पेण्ड्रा : नाबालिग बालक के साथ दुष्कर्म कर उसका वीडियो बनाने के गंभीर मामले में विशेष अपर सत्र न्यायालय पेंड्रा रोड ने सुनवाई करते हुए दो दोषियों को कड़ी सजा सुनाई है. विशेष न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने दोनों आरोपियों को पॉक्सो एक्ट के तहत 10‑10 वर्ष के कठोर कारावास और 10‑10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अपराध अत्यंत जघन्य है और ऐसे मामलों में सख्त दंड समाज में आवश्यक संदेश देने के लिए जरूरी है.
क्या
है मामला?
प्रकरण
के अनुसार 21 अप्रैल 2025 की रात करीब 8 बजे पीड़ित बालक अपने दोस्त के घर जा
रहा था. रास्ते में दोनों आरोपियों ने उसे जबरन रोका और मोटरसाइकिल पर बैठाकर
गौरेला के सुमन निकेतन क्षेत्र के पीछे स्थित जंगल की ओर ले गए. वहां अपराध को
अंजाम देने के बाद मोबाइल फोन से वीडियो बनाया गया.
धमकी
और शिकायत
घटना
के बाद आरोपियों ने पीड़ित को किसी को जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी दी और
उसके साथ मारपीट की. इसके बावजूद पीड़ित की शिकायत पर गौरेला थाने में मामला दर्ज
किया गया. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय
में प्रस्तुत किया.
अदालत
का फैसला और सजा
सुनवाई
के दौरान अदालत ने दोनों आरोपियों को पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 तथा भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया. न्यायालय
ने 10‑10 वर्ष के कठोर कारावास के साथ अर्थदंड लगाया. अदालत
ने यह भी आदेश दिया कि अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त तीन
माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा. अर्थदंड की राशि पीड़ित के उपचार और पुनर्वास
के लिए प्रदान की जाएगी.
11 माह में न्याय
गौरतलब
है कि इस मामले में घटना के लगभग 11 माह के
भीतर फैसला आया है, जिसे त्वरित न्याय की दिशा में
महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अतिरिक्त लोक अभियोजक ने बताया कि अन्य धाराओं में दी
गई सजाएं मुख्य सजा के साथ‑साथ चलेंगी. अदालत के इस फैसले को नाबालिगों के विरुद्ध
अपराधों पर सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है.