जगदलपुर : छत्तीसगढ़ और आंध्रप्रदेश की
सीमा पर माओवाद विरोधी अभियान के बीच एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ के
सुकमा जिले के रहने वाले तीन माओवादियों ने आंध्रप्रदेश के पोलावरम जिले में पुलिस
के सामने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला किया है।
आत्मसमर्पण करने
वालों में माड़वी कोइंदा, हेमला रजनी और कोवासी जोगी शामिल हैं। तीनों माओवादी सुकमा जिले के
चिंतलनार थाना क्षेत्र के पेंटापाड़ इलाके के निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस के
अनुसार, तीनों माओवादी छत्तीसगढ़ और आंध्रप्रदेश के
सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय थे। उनके आत्मसमर्पण को दोनों राज्यों के सीमावर्ती
क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुलिस से मिली प्रारंभिक जानकारी के
अनुसार, आत्मसमर्पण करने
वाले तीनों माओवादियों की पहचान इस प्रकार हुई है, माड़वी
कोइंदा, निवासी पेंटापाड़, चिंतलनार
थाना क्षेत्र, सुकमा। हेमला रजनी, निवासी
पेंटापाड़ क्षेत्र, जिला सुकमा। कोवासी जोगी, निवासी पेंटापाड़ क्षेत्र, जिला सुकमा। बताया जा रहा
है कि तीनों ने आंध्रप्रदेश पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। हालांकि, संगठन में उनकी जिम्मेदारी, पद और गतिविधियों से
जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
छत्तीसगढ़-आंध्रप्रदेश सीमा पर सक्रिय
थे तीनों
सुकमा जिला लंबे
समय से माओवादी गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल रहा है।
विशेष रूप से चिंतलनार और आसपास के वनांचल क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और
माओवादी गतिविधियां प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ और
आंध्रप्रदेश की सीमा से लगे जंगली इलाकों में आवागमन तथा भौगोलिक परिस्थितियों के
कारण सुरक्षा एजेंसियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
इसी क्षेत्र से
संबंधित तीन लोगों के आत्मसमर्पण के बाद पुलिस को उनके संगठनात्मक संपर्कों और
सीमावर्ती गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलने की संभावना है। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से किसी नई जानकारी
की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का
फैसला
पुलिस के सामने
आत्मसमर्पण करने वाले तीनों माओवादियों ने हिंसक गतिविधियों से दूरी बनाकर
मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया है। माओवादी आत्मसमर्पण की घटनाओं को सुरक्षा
के साथ-साथ पुनर्वास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। आत्मसमर्पण करने
वालों के संबंध में संबंधित राज्य की नीति और पात्रता के आधार पर आगे की प्रक्रिया
निर्धारित होती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि तीनों को किसी पुनर्वास योजना
के अंतर्गत सहायता मिलेगी या नहीं।
सीमावर्ती इलाकों में माओवादी
गतिविधियों पर नजर
छत्तीसगढ़ का
बस्तर संभाग लंबे समय से माओवाद से प्रभावित रहा है। सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा और
आसपास के वनांचल क्षेत्रों में सुरक्षाबल माओवाद विरोधी अभियान संचालित करते रहे
हैं। ऐसे में सुकमा के तीन माओवादियों का दूसरे राज्य में आत्मसमर्पण करना दोनों
राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
हालांकि, इन तीन आत्मसमर्पणों से माओवादी नेटवर्क को
कितना नुकसान हुआ है, इसका आकलन उनकी वास्तविक संगठनात्मक
भूमिका और पुलिस से मिलने वाली जानकारी के आधार पर ही किया जा सकेगा। फिलहाल
आंध्रप्रदेश पुलिस की ओर से तीनों माओवादियों के पद, इनाम,
आपराधिक मामलों और आत्मसमर्पण की परिस्थितियों के बारे में विस्तृत
जानकारी सामने आने का इंतजार है।