रायपुर : इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित करते हुए छत्तीसगढ़ को गौरवांवित किया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कृषि शिक्षा अधिमान्यता बोर्ड द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय तथा उसके अंतर्गत संचालित विभिन्न महाविद्यालयों एवं शिक्षण कार्यक्रमों को अधिमान्यता प्रदान करते हुए “ए ग्रेड” दिया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा हाल में ही विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों को अधिमान्यता प्रदान करने संबंधी आदेश जारी किया गया है तथा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न महाविद्यालयों एवं शिक्षण कार्यक्रमों (स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध पाठ्यक्रमों) को वर्ष मार्च 2024 से मार्च 2029 तक अवधि के लिए “ए ग्रेड” के साथ अधिमान्यता प्रदान की गई है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा
जारी सूची के अनुसार इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को देश के उत्कृष्ट कृषि
विश्वविद्यालयों में स्थान प्राप्त हुआ है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय
द्वारा विगत चार वर्षों में शिक्षण, अनुसंधान
एवं प्रसार के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय प्रयासों के कारण यह महत्वपूर्ण
उपलब्धि हासिल हुई है। उल्लेखनीय है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा वर्ष 2019
में जारी अधिमान्यता सूची में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को “बी ग्रेड” प्राप्त हुआ था।
यहां यह भी बताना लाजमी होगा कि
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को विगत वर्ष एनआईआरएफ रैंकिंग में भी 28वां स्थान प्राप्त हुआ था तथा यह एनआईआरएफ रैंकिंग सूची में स्थान प्राप्त
करने वाला छत्तीसगढ़ का एकमात्र विश्वविद्यालय है। कृषि मंत्री श्री रामविचार
नेताम ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अर्जित इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के
लिए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल एवं उनके समस्त सहयोगियों को बधाई और
शुभकामनाएं दी हैं।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को
ए ग्रेड प्राप्त होने से अनेक लाभ होंगे। विश्वविद्यालय की साख में वृद्धि होगी। “ए ग्रेड” मिलने से यह सिद्ध होता है कि
विश्वविद्यालय ने शिक्षण, अनुसंधान, अधोसंरचना
निर्माण, प्रशासन, छात्र सहायता आदि
क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण कार्य किया है। नवीन शिक्षा नीति के तहत
विश्वविद्यालयों को उनके परफार्मेंस अर्थात ग्रेड के आधार पर विभिन्न अधोसंरचनाओं
(महाविद्यालय भवन, हॉस्टल, प्रयोगशाला,
लाइब्रेरी, खेल मैदान आदि) के निर्माण एवं
शिक्षण तथा शोध कार्यक्रमों के संचालन के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का
प्रावधान किया गया है। अतः ग्रेड में वृद्धि से विश्वविद्यालय को भारत सरकार के
विभिन्न विभागों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों, राज्य सरकार तथा
विभिन्न अनुसंधान संस्थाओं से शिक्षण एवं अनुसंधान कार्यक्रमों के लिए अधिक
वित्तीय सहयोग प्राप्त होगा।
राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर
पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की साख बढ़ेगी। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय
संस्थानों के अच्छे विद्यार्थी विश्वविद्यालय की ओर आकर्षित होंगे। अन्य
विश्वविद्यालयों एवं विदेशी संस्थानों के साथ शिक्षण एवं शोध हेतु सहयोग में
बढ़ोतरी होगी। कृषि अनुसंधान, कृषि
प्रसार एवं औद्योगिक सहयोग में इजाफा होगा। भारतीय कृषि अनुसंधान द्वारा जिन
बिंदुओं के आधार पर विभिन्न विश्वविद्यालय को ग्रेड प्रदान की गई है उनमें शिक्षण
व्यवस्था, शिक्षण अधोसंरचनाओं की उपलब्धता, शोध एवं अनुसंधान का स्तर, किसानों तक तकनीकों का
हस्तांतरण, नवाचार, विद्यार्थियों के
प्लेसमेंट की स्थिति आदि प्रमुख है। ग्रेडिंग के दौरान विश्वविद्यालय एवं विभिन्न महाविद्यालयों
में छात्र शिक्षक अनुपात, क्लासरूम, प्रयोगशाला,
लाइब्रेरी, हॉस्टल सुविधा, प्लेग्राऊंड, फर्निचर, आदि की
उपलब्धता का भी ध्यान रखा गया था। इसके साथ ही छात्र प्रवेश प्रक्रिया, पाठ्यक्रम, शिक्षण-अध्यापन का स्तर, एकेडेमिक रेगुलेशन, मूल्यांकन, स्कॉलरशिप, छात्र कल्याण, संस्थागत
डाटाबेस, आदि पर भी ध्यान दिया गया था।
गौरतलब है कि कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल
के हाल के चार वर्षीय कार्यकाल में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने शिक्षा,
अधोसंरचना, अनुसंधान, तकनीकी
विकास तथा किसान कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। नए कृषि
महाविद्यालय स्थापित किए गए हैं। विद्यार्थियों की प्रवेश संख्या में वृद्धि की गई
तथा स्मार्ट कक्षाओं, छात्रावासों और आधुनिक ऑडिटोरियम का
निर्माण किया गया है।
विश्वविद्यालय में स्नातक
पाठ्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी लागू की गई है। विगत वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों एवं
सहायक स्टाफ की भर्ती भी की गई है। विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय
संस्थानों के साथ अपने शैक्षणिक संबंधों को मजबूत किया है। विद्यार्थियों को
विदेशों में उच्च शिक्षा और अनुसंधान के अवसर प्राप्त हुए हैं। डिजिटल शिक्षा को
बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना की गई तथा डिग्री प्रमाणपत्रों को
डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराया गया।