July 17, 2026


कारोबारी को 500 टन चीनी का लालच देकर 1.87 करोड़ की ठगी! खमतराई पुलिस ने 4 लोगों के खिलाफ किया केस दर्ज

रायपुर : व्यापार की चकाचौंध भरी दुनिया में एक बार फिर धोखे का जाल बिछा दिया गया। रायपुर के थोक शक्कर कारोबारी राजेश अग्रवाल (सिंघल प्रोविजन स्टोर्स, श्रीनगर रोड) को 500 टन चीनी सप्लाई करने के बड़े सौदे ने रातोंरात उनकी नींद उड़ा दी। फरवरी 2025 में शुरू हुआ यह सिलसिला अंत में 1 करोड़ 87 लाख 48 हजार 667 रुपये की भारी ठगी में बदल गया।

कैसे रचा गया धोखे का जाल?

सब कुछ शुरू हुआ जब राजेश अग्रवाल की मुलाकात राजीव मोरे नाम के व्यक्ति से हुई। मोरे ने खुद को पुणे स्थित नाथबाबा एग्रो ट्रेड हब प्राइवेट लिमिटेड का प्रतिनिधि बताया। शुरुआत छोटे ऑर्डर से हुई — पहले 35 टन, फिर 70 टन चीनी समय पर सप्लाई हो गई। भरोसा जम गया।

फिर आया बड़ा धमाका — 500 टन चीनी का सौदा। कंपनी ने भरोसा दिलाया कि उनके पास पर्याप्त स्टॉक है। एडवांस मांगा गया। राजेश अग्रवाल ने 17 से 21 फरवरी 2025 के बीच RTGS के जरिए कुल 1.87 करोड़ रुपये कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दिए। भुगतान होते ही कंपनी ने GST इनवॉयस और E-Way बिल भेजे। बताया गया कि ट्रक रवाना हो चुके हैं। राजेश अग्रवाल इंतजार करते रहे… लेकिन चीनी का एक दाना भी रायपुर नहीं पहुंचा।

धोखे का पर्दाफाश
जब शक हुआ तो राजेश ने जांच कराई। पता चला कि जिन ट्रकों के नंबर दिए गए थे, उनमें उनके नाम का कोई माल लोड ही नहीं किया गया था। बाद में उसी वाहनों के नाम पर क्रेडिट नोट जारी कर कागजी खेल खेला गया। कई बार फॉलो-अप करने पर कंपनी के संचालक रफीक बाबा शेख ने व्हाट्सएप पर मैसेज किया कि “राजीव मोरे तो सिर्फ ब्रोकर था”। इसके बाद उनका मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। मिनोज बाबा शेख और गजाला शेख समेत पूरा गिरोह गायब है।

पुलिस एक्शन

शिकायत पर खमतराई थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। नाथबाबा एग्रो ट्रेड हब प्राइवेट लिमिटेड, राजीव मोरे, रफीक बाबा शेख, मिनोज बाबा शेख और गजाला शेख के खिलाफ धोखाधड़ी (IPC 420, 406 आदि) का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन, ई-वे बिल, GST रिकॉर्ड और फर्जी दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। मामले में अंतरराज्यीय ठगी का पहलू भी सामने आ रहा है। राजेश अग्रवाल ने कहा, “छोटे-छोटे ऑर्डर समय पर पूरा करके भरोसा जीता गया। बड़े सौदे में पूरा खेल रचा गया।”पुलिस सूत्र बताते हैं कि इस तरह की कंपनियां छोटे सौदों से भरोसा बनाकर बड़े एडवांस हड़पने का रैकेट चलाती हैं। जांच जारी है, जल्द गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


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