रायपुर : छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा से जुड़े अमूल्य विरासत संरक्षण के प्रयासों को नई प्रेरणा देते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत कोंडागांव जिले के ग्राम बड़े कनेरा का दौरा किया। यहां उन्होंने ज्ञान भारतम् अभियान के तहत संरक्षित लगभग 150 वर्ष पुरानी उड़िया भाषा में लिखित प्राचीन पांडुलिपियों का अवलोकन किया और उनके संरक्षण में जुटे परिवारों की सराहना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने ग्राम निवासी श्री रामूराम यादव से मुलाकात
कर उनके पास सुरक्षित रखी गई आठ प्राचीन पांडुलिपियों को देखा तथा उनके इतिहास,
उपयोग और संरक्षण के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
उन्होंने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक धरोहरें केवल पुस्तकीय विरासत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान
प्रणाली की जीवंत पहचान हैं। इन्हें संरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों
से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने पीढ़ियों से इन पांडुलिपियों को सहेजकर रखने वाले
परिवारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज की भागीदारी के बिना सांस्कृतिक विरासत
का संरक्षण संभव नहीं है। जिन परिवारों ने दशकों तक इन धरोहरों को सुरक्षित रखा है,
वे वास्तव में हमारी ज्ञान-संपदा के संरक्षक हैं। इस अवसर पर बड़े
कनेरा के श्री हरदू कश्यप, श्री परमेश्वर मानिकपुरी, अमरावती के श्री त्रिलोचन मानिकपुरी, श्री पुरसोती
राम मौर्य तथा कोपरा ग्राम के श्री चमरू नाग ने भी मुख्यमंत्री से चर्चा की।
उन्होंने बताया कि ये पांडुलिपियां उनके दादा-परदादाओं के समय से परिवारों में
संरक्षित हैं और आज भी अत्यंत सावधानीपूर्वक सुरक्षित रखी जाती हैं।
संरक्षकों ने मुख्यमंत्री को बताया
कि इन पांडुलिपियों में पंजीयार, पंजी,
पुराण, पंचांग तथा चक्रकूट पंचांग जैसे
महत्वपूर्ण ग्रंथ शामिल हैं, जिनका उपयोग परंपरागत ज्ञान,
धार्मिक अनुष्ठानों, सामाजिक व्यवस्थाओं तथा
ज्योतिषीय गणनाओं में किया जाता रहा है। इन ग्रंथों में स्थानीय सांस्कृतिक
परंपराओं, धार्मिक विधानों और समय गणना की विशिष्ट
प्रणालियों का भी उल्लेख मिलता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने
पांडुलिपियों के अध्ययन की प्रक्रिया, उन्हें
पढ़ने-समझने की पारंपरिक पद्धतियों तथा वर्तमान समय में उनके संरक्षण की व्यवस्था
के संबंध में भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में प्राचीन ज्ञान-संपदा
के संरक्षण, डिजिटलीकरण और व्यवस्थित दस्तावेजीकरण की दिशा
में सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी
अपनी सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा से जुड़ी रह सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री
श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित ज्ञान भारतम् अभियान देश की प्राचीन
पांडुलिपियों, ज्ञान परंपराओं और
सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान भारत की
बौद्धिक विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी ऐतिहासिक जड़ों से
जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।