रायपुर : नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग खेती में लागत घटाने और पैदावार बढ़ाने के लिए सबसे आधुनिक तकनीक है। ये पारंपरिक खादों का एक अत्यधिक कुशल, पर्यावरण के अनुकूल और सस्ता विकल्प हैं, जो फसल के पोषण को सीधा पौधों तक पहुंचाते हैं। पारंपरिक खादों का बहुत बड़ा हिस्सा मिट्टी में बेकार चला जाता है। वहीं नैनो खाद पौधों को सीधा पोषण देते हैं, जिससे पोषक तत्वों का उपयोग 80 प्रतिशत से ज्यादा हो जाता है। रासायनिक खादों के उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग मिट्टी में पोषक तत्वों के संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकता है।
पौधे अधिक स्वस्थ और फसल
का शानदार विकास -किसान भूषण साहू
कृषि के आधुनिक तकनीकों को अपनाकर
किसान न केवल अपनी लागत कम कर रहे हैं, बल्कि
बेहतर उत्पादन भी ले रहे हैं। ऐसा ही एक उदाहरण महासमुंद जिले के ग्राम कोसरंगी के
प्रगतिशील किसान श्री भूषण साहू ने पेश किया है। उन्होंने अपनी धान की फसल में
पारंपरिक दानेदार खादों की निर्भरता को कम करते हुए नैनो डीएपी और नैनो यूरिया
प्लस (तरल खाद) का सफल प्रयोग किया है, जिससे उनके पौधे अधिक
स्वस्थ और फसल का विकास शानदार हुआ है। डिमास्ट्रेशन से मिला भरोसा, आधी हो गई दानेदार खाद की जरूरत किसान भूषण साहू ने अपना अनुभव साझा करते
हुए बताया कि खरीफ 2024 में कृषि विभाग और इफको महासमुंद के
क्षेत्रीय अधिकारियों ने उन्हें नैनो यूरिया के प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) के लिए
प्रोत्साहित किया था।
बेहद लाभकारी है नैनो
यूरिया और नैनो डीएपी किसान का अनुभव
शुरुआत में पारंपरिक खेती की तुलना
में नैनो यूरिया वाले पौधे थोड़े कम हरे दिख रहे थे, लेकिन
वे पूरी तरह स्वस्थ थे। जब फसल कटी और उत्पादन की तुलना की गई, तो दोनों का उत्पादन बिल्कुल बराबर था। इसके बाद रबी 2024 में मैंने नैनो डीएपी से बीजोपचार किया और फसल 30-35 दिन की होने पर 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से
इसका छिड़काव किया। नतीजा यह रहा कि पारंपरिक दानेदार डीएपी की मात्रा 50 प्रतिशत आधी करने के बाद भी उत्पादन में कोई कमी नहीं आई। इस सफल प्रयोग
के बाद से भूषण साहू नियमित रूप से तरल नैनो उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं और
उन्होंने अपने खेतों में पारंपरिक दानेदार खादों की खपत को 30 प्रतिशत तक घटा दिया है। उनका कहना है कि यह तकनीक भविष्य की खेती के लिए
बेहद लाभकारी है। यह कहना है महासमुंद के किसान भूषण साहू का।
कृषि विभाग की अपील और
महासमुंद जिले का लक्ष्य
इस वर्ष खाद की सुचारू आपूर्ति बनाए
रखने और किसानों की लागत घटाने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने किसानों से अधिक से
अधिक तरल खादों नैनो यूरिया प्लस एवं नैनो डीएपी का उपयोग करने की अपील की है।
जिले में मांग और खपत को देखते हुए इस वर्ष एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
नैनो डीएपी (500 एम एल) 74 हजार बोतल का लक्ष्य, नैनो यूरिया 500 एम एल 30 हजार 250 बोतल का
लक्ष्य रखा गया है।
नैनो उर्वरकों के उपयोग
की सही विधि
कृषि विभाग के अनुसार किसानों की
सुविधा के लिए विभाग द्वारा नैनो खादों के इस्तेमाल के सही तरीके व वैज्ञानिक विधि
की जानकारी दी गई है। बीजोपचा- 1 किलोग्राम
बीज में 5 एम एल नैनो डीएपी का घोल अच्छी तरह मिलाएं। मिलाने
के बाद 20 मिनट तक छांव में सुखाएं, फिर
बुवाई करें। थरहा/रोपा उपचार के लिए 1 लीटर पानी में 5
एम एल नैनो डीएपी मिलाकर घोल तैयार करें। रोपाई से पहले धान के थरहा
(पौध) को 20 मिनट तक घोल में डुबोकर रखें। पहला छिड़काव फसल 30-35
दिन होने पर 1 लीटर पानी में 4-5 एम एल नैनो डीएपी और नैनो यूरिया प्लस मिलाएं। जब फसल में पत्तियां अच्छी
तरह आ जाएं, तब स्प्रेयर से छिड़काव करें। दूसरा छिड़काव फूल
आने से ठीक पहले 1 लीटर पानी में 4-5 एम
एल नैनो यूरिया प्लस का घोल बनाएं। पहले छिड़काव के 25-30 दिन
बाद (पोटरी पानी के समय) पत्तियों पर छिड़कें।
नैनो उर्वरकों को अधिकांश कीटनाशकों
के साथ मिलाकर स्प्रे किया जा सकता है, लेकिन
इन्हें कॉपर (तांबा) युक्त कीटनाशकों और फफूंदनाशकों के साथ बिल्कुल न मिलाएं।