रायपुर : भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा देशभर में “ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण” संचालित किया जा रहा है। इस महत्त्वपूर्ण पहल का उद्देश्य देशभर में बिखरी अमूल्य पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण और संरक्षण सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में छत्तीसगढ में भी इस सर्वेक्षण को प्रभावी रूप से लागू करने की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है, जिसमें जन-जागरूकता पर विशेष बल दिया जा रहा है।
यह सर्वेक्षण उन पांडुलिपियों को
खोजने और सूचीबद्ध करने का प्रयास है, जो
वर्तमान में परिवारों, मंदिरों, मठों,
संस्थानों या निजी संग्रहों में सुरक्षित है, लेकिन
अभी तक औपचारिक रूप से सर्वेक्षित नहीं हो पाई हैं। यह पहल इन छिपी हुई
ज्ञान-संपदाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
है। सर्वेक्षण के पश्चात सरकार इनका डिजिटाइजेशन और संरक्षण करेगी। पांडुलिपियों
का स्वामित्व उनको धारण करने वाले व्यक्ति, परिवार और संस्था
का ही रहेगा।
ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि
सर्वेक्षण अभियान में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
इसमें पांडुलिपि धारण करने वाले परिवार, संस्था,
विद्वान एवं शोधकर्ता मंदिर एवं धार्मिक संस्थान, पुस्तकालय एवं शैक्षणिक संस्थाएं, जागरूक नागरिक के
अतिरिक्त, सरकार द्वारा अधिकृत सर्वेक्षक भी इस अभियान में
सक्रिय भूमिका निभाएंगे। ऐसे नागरिक जिन्हें अपने आसपास पांडुलिपियों की जानकारी
है, वे भी इस सर्वेक्षण से जुड़कर महत्वपूर्ण योगदान दे सकते
हैं।
इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ने के लिए
डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं। कोई भी व्यक्ति या संस्था अपने पास उपलब्ध
पांडुलिपियों को ज्ञानभारतम डॉट कॉम पोर्टल और ‘ज्ञानभारतम’
मोबाइल एप के माध्यम से आवश्यक जानकारी दर्ज कर इस राष्ट्रव्यापी
सर्वेक्षण अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। भारत की पांडुलिपियां केवल ऐतिहासिक
दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और दार्शनिक विरासत, ज्ञान परंपरा की
जीवंत धरोहर हैं। इनमें आयुर्वेद, साहित्य, गणित, खगोलशास्त्र और जीवन दर्शन का अमूल्य ज्ञान
संचित है। ऐसे में इनका संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
राज्य के नागरिकों से अपील की गई है
कि यदि उनके पास ऐसी पांडुलिपियां हैं जो अब तक सर्वेक्षित नहीं हैं,
या उन्हें किसी स्थान, परिवार या संस्था में
पांडुलिपियों की जानकारी है, तो वे इस सर्वेक्षण से अवश्य
जुडें। यह राष्ट्रीय अभियान हमारी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का एक
ऐतिहासिक अवसर है, जिसमें हर नागरिक की भागीदारी अत्यंत
महत्वपूर्ण है। ज्ञान की इस विरासत को संजोना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है, आइए मिलकर इसे सुरक्षित करें।