रायपुर : दीनदयाल अन्त्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं स्वरोजगार, प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और बाजार से जुड़ने का अवसर प्राप्त कर रही हैं। इसी का परिणाम है कि कई महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
धमतरी जिले के विकासखंड कुरूद के
ग्राम चर्रा की श्रीमती योगेश्वरी देवांगन ऐसी ही प्रेरणादायक महिला हैं,
जिन्होंने आजीविका मिशन से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत
की, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी मिसाल कायम की
है।
जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में
योगेश्वरी देवांगन, अध्यक्ष जय माँ
परमेश्वरी स्वयं सहायता समूह ग्राम चर्रा का चयन राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित छठवें
जेंडर संवाद के लिए किया गया। इस संवाद में उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के
माध्यम से “महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लैंगिक निवेश
क्यों आवश्यक है” विषय पर अपने अनुभव साझा किए।
योगेश्वरी बताती हैं कि समूह से
जुड़ने से पहले उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था और आजीविका का मुख्य साधन कृषि
और मजदूरी था। इससे बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो
जाता था। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनकी सोच और जीवन दोनों में सकारात्मक
बदलाव आया।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के
सहयोग से उन्होंने बैंक से ऋण प्राप्त किया और पशुपालन विभाग,
कृषि विज्ञान केन्द्र तथा आर-सेटी से मुर्गीपालन का प्रशिक्षण लिया।
इसके बाद उन्होंने अपने गांव में देशी मुर्गी फार्म की शुरुआत की। शुरुआत में
सामाजिक दबाव और कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी
मेहनत और परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
आज उनका फार्म एक सफल उद्यम बन चुका
है। उनके फार्म में करीब सात प्रकार की मुर्गी की नस्लें,
बटेर, बत्तख, गिनी फाउल
और टर्की का पालन किया जा रहा है। अंडों से चूजे निकालने के लिए आधुनिक मशीन भी
स्थापित की गई है।
शुरुआत में बाजार की जानकारी नहीं
होने के कारण उन्हें कठिनाई हुई, लेकिन
उन्होंने सोशल मीडिया को मार्केटिंग का माध्यम बनाया। वे “देवांगन
देशी मुर्गी फार्म चर्रा कुरूद” नाम से यूट्यूब चैनल भी
संचालित कर रही हैं, जिसके माध्यम से अपने उत्पादों का
प्रचार करने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर
रही हैं।
योगेश्वरी देवांगन का लक्ष्य है कि
उनके समूह की अधिक से अधिक महिलाएं भी स्व-रोजगार से जुड़कर अपनी आय बढ़ाएं। इसी
उद्देश्य से वे अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें मुर्गीपालन जैसे व्यवसाय से
जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। भविष्य में वे खरगोश पालन जैसे नए उद्यम की शुरुआत
करने की भी योजना बना रही हैं।
योगेश्वरी देवांगन की सफलता कहानी यह
दर्शाती है कि यदि महिलाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण
और अवसर मिले तो वे न केवल अपनी जिंदगी बदल सकती हैं, बल्कि
पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव भी रख सकती हैं। आज वे अपने गांव
और जिले की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बन
चुकी हैं।