January 25, 2026


डंकिनी के बाद अब शबरी निशाने पर

दंतेवाड़ा–सुकमा सीमा पर हंगामा, जनप्रतिनिधियों ने रोकी ज़हरीला कचरा ढोती ट्रकें

मित्तल का ‘लाल ज़हर’ सुकमा में खपाने की साजिश बेनकाब

अरुण शर्मा/संवाददाता

किरंदुल/दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी नदियों पर औद्योगिक हमले की एक और खौफनाक कहानी सामने आई है। डंकिनी नदी को प्रदूषण की भेंट चढ़ाने के बाद अब आर्सेलर मित्तल कंपनी द्वारा निकलने वाले ‘लाल ज़हर’ को सुकमा जिले में डंप करने की साजिश उजागर हुई है। मामला सामने आते ही इलाके में भारी आक्रोश फैल गया।

सूत्रों के अनुसार किरंदुल स्थित मित्तल कंपनी के प्लांट से निकलने वाला खतरनाक अपशिष्ट भारी ट्रकों में भरकर दंतेवाड़ा होते हुए सुकमा की ओर भेजा जा रहा था। इसी दौरान गमावाड़ा पंचायत क्षेत्र में जागरूक जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने ट्रकों को बीच रास्ते में घेर लिया और ज़हरीले कचरे के परिवहन को रोक दिया।

 नदी–जंगल–आदिवासी जीवन पर सीधा हमला

स्थानीय लोगों का आरोप है कि

यह लाल ज़हर पहले ही डंकिनी नदी को बर्बाद कर चुका है

अब शबरी नदी, जंगल और आदिवासी कृषि भूमि को निशाना बनाया जा रहा है

बिना ग्रामसभा अनुमति और पर्यावरण स्वीकृति के यह पूरा खेल चल रहा है

जनप्रतिनिधियों ने साफ कहा कि

“अगर प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो सुकमा एक और औद्योगिक ज़हरखाना बन जाएगा।”

बड़े सवाल, प्रशासन मौन क्यों?

किसकी अनुमति से ज़हरीला अपशिष्ट ले जाया जा रहा था?

क्या पर्यावरण विभाग ने आंखें मूंद रखी हैं?

आदिवासी क्षेत्रों को ही डंपिंग ग्राउंड क्यों बनाया जा रहा है?

चेतावनी भरा संदेश

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने दो टूक कहा है कि यदि दोबारा लाल ज़हर ढोने की कोशिश हुई तो उग्र जन आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन और कंपनी की हो।


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