January 07, 2026


धान खरीदी की धीमी गति से किसान बेहद परेशान,सोसायटी से धान उठाव न होने से बनी है जाम की स्थिति: सुशील मौर्य

छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार धान खरीदी की व्यवस्था का बुरी तरह से बदहाल होना भाजपा सरकार की दुर्भावना का परिणाम

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जिला मुख्यालय जगदलपुर बस्तर में धान खरीदी की धीमी गति से किसान बेहद परेशान है, सोसायटीयों से धान का उठाव न होने से जाम की स्थिति बनी हुई है,धान खरीदी पूरी तरह प्रभावित हो रही है आने वाले समय में जल्द से जल्द धान खरीदी नहीं हुई तो हजारों क्विंटल धान बर्बादी व खराब हो जाएंगे। बस्तर जिले के 30 से अधिक धान खरीदी केंद्रों में उठाव न होने से अब तौल ही बंद करना पड़ेगा जो कि भाजपा सरकार की किसानों के प्रति दुर्भावना का परिणाम है उक्त बातें बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कही है।

शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा जिस प्रकार से समर्थन मूल्य दो सालों में बढ़ा है। 117 और 69 रुपये उस हिसाब से धान की खरीदी 3286 रुपये प्रति क्विंटल में होनी चाहिए़, लेकिन भाजपा सरकार द्वारा 3100 रुपये में धान खरीदी की गई है। सरकार के किसान विरोधी नीतियों के कारण किसानों का प्रति एकड़ में 21 क्विंटल के हिसाब से 3906 रुपये का नुकसान होगा। कुल 160 लाख मीट्रिक टन की खरीदी में लगभग 2900 करोड़ रुपये सरकार किसानों का दबा लेगी। बस्तर जिले में न ही समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी हुई न ही टोकन की सार्थक व्यवस्था की गई किसानों को सिर्फ परेशान करने का कार्य भाजपा सरकार ने किया है सिर्फ और सिर्फ किसानों को छलने का कार्य भाजपा सरकार ने किया है आज पर्यंत तक न ही प्रदेश अध्यक्ष भाजपा विधायक किरण देव और न ही बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कोई पहल की और न ही किसानों के निराकरण हेतु कोई कार्य किया। जिले में अब तक करीब 10 हजार से अधिक किसानों ने करीब 6 लाख क्विंटल धान बेच दिया है। जैसे -जैसे खरीदी के दिन खत्म हो रहे है वैसे- वैसे केंद्रों में धान की मात्रा बढ़ रही है। लेकिन इस धान के उठाव को लेकर अब तक कोई कोशिश भाजपा सरकार और न ही जिला प्रशासन के द्वारा शुरू की गई है। समय पर धान का उठाव नहीं होने से अब बफर लिमिट वाल केंद्रों की संख्या में इजाफा हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर केंद्रों में धान की मात्रा बढ़ रही है। जल्द से जल्द धान खरीदी नहीं हुई तो हजारों क्विंटल धान बर्बाद जाएंगे किंतु भाजपा सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंग रहा है।

बस्तर संभाग में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू हुई है खरीदी के 20 दिन बीत जाने के बाद भी धान का उठाव नहीं हो सका है आने वाले दिनों में और अधिक बढ़ने की आशंका दिखाई दे रही है। भाजपा सरकार की दुर्भावना के कारण ही छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार धान खरीदी व्यवस्था इतनी बदहाल है।


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