रायपुर : क्षेत्रीय नेत्र अनुसंधान संस्थान (RIO)एवं नेत्र रोग विभाग, पं. जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर द्वारा आज "नेत्रदान प्रक्रियाओं पर नवीनतम जानकारी” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन टेलीमेडिसिन हॉल, डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर में किया गया।
यह कार्यशाला प्रदेश के विभिन्न
जिलों से आए नेत्र सहायक अधिकारियों एवं सहायक नेत्रदान अधिकारियों के लिए आयोजित
की गई। स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय द्वारा 32 जिलों से प्रतिभागियों का नामांकन किया गया तथा नामांकन अनुसार प्रदेश के
विभिन्न जिलों से 100 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में
भाग लिया।
स्वास्थ्य मंत्री की
प्रेरणा से शुरू हुई पहल
कुछ माह पूर्व चिकित्सा महाविद्यालय
में आयोजित एक कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल ने
श्रीलंका में नेत्रदान की उच्च दर का उल्लेख करते हुए प्रदेश में नेत्रदान को और
अधिक बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने विभाग को इस दिशा में ठोस
पहल करने के लिए प्रेरित किया था। इसी प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्रीय नेत्र
अनुसंधान संस्थान द्वारा यह कार्यशाला आयोजित करने की पहल की गई। राष्ट्रीय
नेत्रदान पखवाड़े (25 अगस्त से 8 सितम्बर) के प्रारंभ होने से पहले नेत्रदान से जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों को
व्यापक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया गया, ताकि
वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संभावित
दाताओं के परिवारों की प्रभावी काउंसलिंग करने में सक्षम हो सकें।
नेत्रदान की पूरी
प्रक्रिया पर व्यावहारिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान नेत्रदान हेतु
शोकग्रस्त परिवारों से संवाद एवं काउंसलिंग, परिवार
की आशंकाओं एवं भ्रांतियों का समाधान, डोनर चयन एवं मेडिकल
स्क्रीनिंग, कॉर्निया प्राप्त करने की तकनीक, ऊतक संरक्षण, कोल्ड चेन एवं सुरक्षित परिवहन जैसे
महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
इसके साथ ही कन्सेंट फॉर्म ( Consent
Forms), डेथ सर्टिफिकेट (Death Certificate) एवं
आई बैंक रिकॉर्ड्स (Eye Bank Records) सहित आवश्यक
दस्तावेजीकरण पर भी जानकारी दी गई। वास्तविक मामलों पर चर्चा, इंटरैक्टिव क्विज तथा महाविद्यालय के छात्र छात्राओं द्वारा कठिन
परिस्थितियों में परिवारों से संवाद एवं परामर्श हेतु रोल प्ले (Role -
Play) के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक जानकारी दी गई।
कार्यशाला की विशेषता यह रही कि
इसमें केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रहकर हैंड्स-ऑन एवं डेमोंस्ट्रेशन
आधारित प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया। एन्यूक्लिएशन (नेत्रगोलक निकालने) की
वीडियो डेमोंस्ट्रेशन, इन-सिटू कॉर्नियोस्क्लेरल
रिम की तैयारी एवं संरक्षण, काउंसलिंग सत्र, डॉक्यूमेंटेशन तथा मॉइस्ट चैंबर (Enucleation, in-situ
corneoscleral rim retrieval, preservation, transport, counselling,
documentation तथा moist chamber) तैयार करने
की प्रक्रिया प्रदर्शित की गई।
अधिष्ठाता एवं अधीक्षक
के सहयोग से साकार हुई पहल
कार्यशाला के सफल आयोजन में
महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी के मार्गदर्शन एवं सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका
रही। साथ ही अधीक्षक डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय,
डॉ. संतोष सोनकर द्वारा कार्यशाला के लिए व्यवस्थागत सहयोग एवं अन्य
संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं| सक्रिय प्रशासनिक सहयोग
से इतने बड़े राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सुचारु संचालन संभव हो सका।
क्षेत्रीय नेत्र अनुसंधान संस्थान
द्वारा सहयोग के लिए महाविद्यालय प्रशासन एवं चिकित्सालय प्रशासन के प्रति आभार
व्यक्त करते हुए कहा गया कि “इस
कार्यशाला का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि
नेत्रदान से जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों के ज्ञान, कौशल और
संवेदनशीलता को मजबूत करना है। अधिष्ठाता महोदय एवं अधीक्षक महोदय के सहयोग से हम
इस पहल को प्रभावी रूप से साकार कर पाए हैं। यह सहयोग नेत्रदान को बढ़ावा देने के
हमारे प्रयासों को नई ऊर्जा देता है।”
नेत्रदान की सफलता के लिए चिकित्सकों
के साथ-साथ नेत्र सहायक अधिकारियों और सहायक नेत्रदान अधिकारियों की भूमिका अत्यंत
महत्वपूर्ण है। यही स्वास्थ्यकर्मी संभावित दाता की पहचान,
परिवार से संपर्क, काउंसलिंग, नेत्र प्राप्ति, संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण की
प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े से पहले
आयोजित यह प्रशिक्षण प्रदेश में नेत्रदान की गतिविधियों को और मजबूत करने की दिशा
में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों की
जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा उन्हें अपने-अपने कार्यक्षेत्र में प्रशिक्षण
से प्राप्त ज्ञान एवं कौशल का उपयोग कर अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के लिए
प्रेरित करने का संदेश दिया गया।कार्यशाला का समापन पोस्ट-टेस्ट एवं प्रतिभागियों
से फीडबैक के साथ किया गया।
दृष्टि का उपहार- आशा की
विरासत-जीवन को नया आयाम
कार्यशाला का संदेश यही रहा कि एक
नेत्रदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में दृष्टि और आशा का नया उजाला ला सकता
है। प्रदेश में नेत्रदान की संस्कृति को मजबूत करने के लिए जन-जागरूकता के साथ-साथ
प्रशिक्षित एवं संवेदनशील स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।