रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (‘बिहान’) योजना ग्रामीण अंचलों में महिलाओं के जीवन में खुशहाली और आर्थिक स्वावलंबन का नया अध्याय लिख रही है। नारायणपुर जिले के ग्राम पंचायत गरांजी की रहने वाली श्रीमती जेलो बाई की कहानी इस बदलाव का एक जीवंत उदाहरण है, जो आज जिले ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं।
’तंगी से
जूझता परिवार और अनिश्चित भविष्य’
वर्ष 2016 से पहले जेलो बाई का जीवन अभावों और आर्थिक
तंगी के बीच बीत रहा था। परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन कृषि मजदूरी और उनके
पति का सिलाई कार्य था। सीमित और अनिश्चित आय के कारण परिवार का भरण-पोषण और दैनिक
जरूरतें पूरी करना एक बड़ी चुनौती बनी रहती थी।
’‘बिहान’
से मिली नई दिशा और संबला’
कलेक्टर के
मार्गदर्शन में जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने चलाए जा रहे अभियानों के तहत
जेलो बाई वर्ष 2016 में ‘जय मां शेरावली स्व-सहायता समूह’ से जुड़ीं। समूह से
जुड़ने के बाद उन्होंने वित्तीय अनुशासन और नियमित बचत के महत्व को समझा और क्लस्टर
एवं ग्राम संगठन के मार्गदर्शन में आजीविका के नए रास्ते तलाशे। इसके साथ ही समूह
के माध्यम से शुरुआती 15 हजार रुपये की चक्रीय निधि (त्थ्)
प्राप्त की और व्यवसाय बढ़ाने के लिए 4 लाख रुपये का बैंक
लिंकेज ऋण हासिल किया।
’एक
शुरुआत, कई आजीविका: प्रतिमाह 30 हजार
तक आय’
बैंक से मिले
वित्तीय सहयोग से जेलो बाई ने सबसे पहले गांव में एक किराना दुकान खोली। अपनी कड़ी
मेहनत और सूझबूझ से इस व्यवसाय को सफल बनाने के बाद उन्होंने अपने दायरा और बढ़ाया।
उन्होंने मत्स्य पालन,कपड़ा
सिलाई और उन्नत कृषि कार्य जैसे विविध आजीविका गतिविधियों को अपनाकर जेलो बाई आज
प्रतिमाह 20 से 30 हजार रुपये तक की
शानदार आय अर्जित कर रही हैं।
’मुख्यमंत्री
का जताया आभार’
पारिवारिक स्थिति
में आए इस ऐतिहासिक बदलाव और आत्मनिर्भरता पर खुशी जाहिर करते हुए जेलो बाई ने
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और शासन की श्बिहानश् योजना के प्रति सहृदय
धन्यवाद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन, सामूहिक शक्ति और शासन की योजनाओं का सही उपयोग
किया जाए, तो परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, सफलता हासिल की जा सकती है।