रायपुर। विधानसभा के मानसून सत्र में नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ को लेकर आभार प्रस्ताव पेश किया गया। संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने सदन में प्रस्ताव रखा, जिस पर सत्ता पक्ष ने केंद्र सरकार, सुरक्षा बलों और शहीद जवानों के योगदान की सराहना की। वहीं कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का बहिष्कार करते हुए चर्चा में हिस्सा नहीं लिया और इसे राजनीतिक प्रस्ताव बताया।
संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने
रखा प्रस्ताव
सदन में संसदीय कार्य मंत्री केदार
कश्यप ने नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ को लेकर आभार प्रस्ताव प्रस्तुत किया। विपक्ष की
गैरमौजूदगी में प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई और भाजपा विधायकों ने इसे राज्य के लिए
ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
अजय चंद्राकर ने केंद्र सरकार और
शहीदों को दिया श्रेय
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने चर्चा
के दौरान कहा कि नक्सलवाद के कारण करीब 20
हजार लोगों ने अपनी जान गंवाई। उन्होंने सभी मृतकों और शहीद सुरक्षा बलों को
श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जिन वीरों ने अपने प्राणों की आहुति देकर
नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को सफल बनाया, उन्हें पूरा प्रदेश
नमन करता है। उन्होंने कहा कि एक समय जल, जंगल और जमीन की
लड़ाई बंदूक की नोक पर लड़ी जाती थी, लेकिन अब हालात बदल रहे
हैं।
डिप्टी सीएम अरुण साव का कांग्रेस पर
हमला
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि आज
बस्तर नक्सल मुक्त होकर खुश है और पूरा छत्तीसगढ़ तथा देश इस उपलब्धि पर गौरवान्वित
है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सदन में कांग्रेस की कुर्सियां
खाली हैं और आने वाले समय में पूरे देश से भी कांग्रेस खाली हो जाएगी।
केदार कश्यप बोले- विपक्ष सामना नहीं
कर पा रहा
कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने
कांग्रेस की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष इस चर्चा क सामना नहीं कर
पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई विधायक नक्सलियों के समर्थन में
रहे हैं, इसलिए वे इस प्रस्ताव पर
चर्चा से बच रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने बताई
बहिष्कार की वजह
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने
कहा कि कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का बहिष्कार करने का फैसला किया है और चर्चा में
हिस्सा नहीं लेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्ताव में शहीदों का उल्लेख नहीं
किया गया है। महंत ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय नक्सल विरोधी अभियानों पर हुए
खर्च की राशि केंद्र सरकार वापस नहीं मांगती थी, लेकिन
अब राज्य से राशि मांगी जा रही है। उन्होंने आभार प्रस्ताव को "चापलूसी और
चमचागिरी" वाला प्रस्ताव करार दिया।
प्रस्ताव पर सत्ता और विपक्ष
आमने-सामने
नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ को लेकर लाए
गए प्रस्ताव ने विधानसभा में राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर भाजपा इसे
सुरक्षा बलों और केंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धि बता रही है,
वहीं कांग्रेस इसे अधूरा और राजनीतिक उद्देश्य से लाया गया प्रस्ताव
बता रही है।