रायपुर : राज्य में मानसून-2026 के दौरान औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए आज आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की मुख्य आतिथ्य में बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की प्रमुख मीडियम एवं लार्ज स्केल औद्योगिक इकाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री
श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में
छत्तीसगढ़ सरकार विकसित भारत-2047 के
विजन के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। औद्योगिक विकास
और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। राज्य सरकार निवेश-अनुकूल वातावरण
तैयार कर रही है, लेकिन पर्यावरणीय मानकों से किसी भी प्रकार
का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल
लक्ष्य पूरा करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि
लगाए गए पौधों का जीवित रहना सबसे महत्वपूर्ण है। सही समय पर, उपयुक्त प्रजाति के स्वस्थ पौधों का रोपण तथा उनकी नियमित देखभाल और
सिंचाई सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने उद्योगों से पीपल, शिरीष, नीम, आम, कटहल सहित स्थानीय एवं दीर्घायु प्रजातियों को प्राथमिकता देने का आग्रह
किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी 'मन की बात' कार्यक्रम में मियावाकी पद्धति जैसी
आधुनिक वृक्षारोपण तकनीकों का उल्लेख किया है और ऐसे नवाचारों को अपनाने से हरित
आवरण तेजी से बढ़ाया जा सकता है।
मंत्री श्री चौधरी ने सभी उद्योगों
से अपने परिसर तथा आसपास हरित वातावरण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने
निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक वृक्षारोपण का
निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए तथा 15 अगस्त तक
गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की ऑनलाइन
मॉनिटरिंग की जाएगी तथा पोर्टल पर समयबद्ध प्रविष्टि अनिवार्य होगी।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण
केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि
नैतिक जिम्मेदारी भी है। स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित
पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उद्योगों को
उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का भी पूरी गंभीरता से पालन करना
चाहिए। उन्होंने उद्योगों से अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के माध्यम से भी व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने तथा अधिकाधिक लोगों की
सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
मंत्री श्री चौधरी ने बताया कि नवा
रायपुर को "पीपल सिटी" के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष अभियान
चलाया जा रहा है। शहर में पूर्व में लगाए गए लगभग 70 हजार पौधों के अतिरिक्त आगामी पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के
पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि नवा रायपुर की
पहचान बन चुकी सेंध (Sendh) लेक का गहरीकरण
एवं सौंदर्यीकरण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इससे लगभग 12 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित होगी तथा झील का क्षेत्रफल
भी बढ़ेगा। झील के मध्य स्थित लगभग तीन एकड़ के द्वीप पर मियावाकी पद्धति से लगभग 25
हजार पौधे लगाए गए हैं, जिससे प्रवासी
पक्षियों के लिए प्राकृतिक "बर्ड आइलैंड" (ईको-हब) विकसित किया जा रहा
है।
आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव तथा
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अध्यक्ष श्री अंकित आनंद ने कहा कि पिछले एक
वर्ष में मंडल ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक लगभग 22 लाख पौधों का रोपण किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य
का लगभग 90 प्रतिशत है। इस वर्ष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों को
ही अंतिम माना जाएगा तथा सभी उद्योगों को समय पर ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करनी
होगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 25 लाख पौधरोपण का लक्ष्य
रखा गया है, जो उद्योगों की सक्रिय सहभागिता से 30 लाख से अधिक तक पहुंच सकता है।
सचिव श्री आनंद ने बताया कि 320
से अधिक उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली के
माध्यम से निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रारंभिक चरण में नियमों के उल्लंघन पर
नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन मंडल का उद्देश्य दंड देना
नहीं, बल्कि प्रदूषण कम करते हुए पर्यावरणीय अनुपालन
सुनिश्चित करना है। उन्होंने उद्योगों से पुनर्चक्रित (रिसाइकिल) जल के अधिकतम
उपयोग तथा देशी एवं पर्यावरण-अनुकूल वृक्ष प्रजातियों के रोपण पर विशेष ध्यान देने
का आग्रह किया।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के
सदस्य सचिव श्री राजू अगसिमनी ने उद्योगों को निर्देश दिए कि प्रत्येक हेक्टेयर
में न्यूनतम 2,500 पौधे लगाए जाएं तथा
त्रि-स्तरीय (थ्री-लेयर) पौधरोपण के माध्यम से सघन ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए। सभी
औद्योगिक इकाइयों को अपने परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत
क्षेत्र में हरित क्षेत्र विकसित करने, केवल स्वीकृत पौध
प्रजातियों का रोपण करने तथा पौधों की सिंचाई के लिए पुनर्चक्रित जल का उपयोग करने
के निर्देश दिए गए।
उन्होंने सभी उद्योगों को ऑनलाइन सतत
उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (एनालाइजर) 24 घंटे संचालित रखने तथा प्रत्येक तीन माह में उसका नियमित कैलिब्रेशन कराने
के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण अभियान की सफलता का वास्तविक
पैमाना लगाए गए पौधों की संख्या नहीं, बल्कि उनका संरक्षण और
जीवित रहना है।
बैठक में राज्य की प्रमुख औद्योगिक
इकाइयों के प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट एवं
डायरेक्टर स्तर के प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण
मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।