जगदलपुर। साल 2008… एक दंपति ने नई जिंदगी की शुरुआत की। सपने थे कि घर में बच्चे की किलकारी गूंजेगी, लेकिन वक्त बीतता गया और संतान सुख नहीं मिला। डॉक्टरों से इलाज कराया गया। जांच में सामने आया कि महिला पीसीओडी (PCOD) की समस्या से जूझ रही है। इलाज के बीच एक बार गर्भ भी ठहरा, लेकिन छह महीने बाद वह भी नहीं बच सका। यह घटना दंपति के लिए सबसे बड़ा मानसिक आघात साबित हुई। यहीं से उनकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने उन्हें विज्ञान और इलाज से हटाकर तंत्र-मंत्र, पूजा-पाठ और चमत्कारों की दुनिया में पहुंचा दिया।
इसी दौरान उनकी मुलाकात वन विभाग में
पदस्थ वन रक्षक डूमर राम नायक और उसकी पत्नी शिखा नायक से हुई। आरोप है कि दोनों
ने खुद को ऐसे लोगों के रूप में पेश किया, जो
विशेष पूजा, झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र और
दुर्लभ धार्मिक सामग्री के जरिए संतान सुख दिला सकते हैं।
शुरुआत छोटी-छोटी पूजाओं से हुई। फिर
हर कुछ दिनों में नया अनुष्ठान, नई पूजा
और नया खर्च सामने आने लगा। कभी दुर्लभ जड़ी-बूटियों की जरूरत बताई गई, कभी विशेष ताबीज, कभी ताम्रपत्र, तो कभी चमत्कारी रुद्राक्ष का दावा किया गया। संतान पाने की चाह इतनी बड़ी
थी कि दंपति ने बिना किसी सवाल के हर मांग पूरी करनी शुरू कर दी। उन्हें विश्वास
था कि अब उनकी अधूरी ख्वाहिश जरूर पूरी होगी।
शिकायत के मुताबिक,
वर्ष 2015 से 2021 तक
लगातार पैसे लिए जाते रहे। कभी 15 लाख रुपये की विशेष पूजा
कराई गई तो कभी भगवान शिव की जटाओं से गिरा हुआ बताकर एक रुद्राक्ष एक लाख रुपये
में बेच दिया गया। हर बार कहा गया कि अब बस अंतिम पूजा बाकी है और इसके बाद सारी
परेशानियां खत्म हो जाएंगी। धीरे-धीरे दंपति की पूरी आर्थिक स्थिति बदलने लगी।
आरोप है कि उन्होंने अपनी जमा पूंजी निकाल दी, एफडी तुड़वा
दी, जमीन-जायदाद बेच दी और जो कुछ था, वह
सब कथित तौर पर पूजा-पाठ और तंत्र-मंत्र के नाम पर देते चले गए।
शिकायत में दावा किया गया है कि इस
पूरे दौर में करीब डेढ़ करोड़ रुपये आरोपियों को दिए गए। इतना ही नहीं,
दंपति का आरोप है कि उन्हें मानसिक रूप से भी पूरी तरह अपने प्रभाव
में रखा गया। घर के चारों ओर जड़ी-बूटियां गाड़ दी गईं, अलग-अलग
चीजें खिलाई गईं और यह विश्वास दिलाया गया कि अगर उन्होंने पूजा बीच में छोड़ी या
सवाल उठाया तो उनका परिवार हमेशा के लिए बर्बाद हो जाएगा। डर और विश्वास के इसी
मिश्रण ने उन्हें वर्षों तक इस कथित जाल से बाहर नहीं निकलने दिया।
साल 2017 में दंपति के घर बेटे का जन्म हुआ। परिवार को लगा कि वर्षों से कराई जा
रही पूजा और अनुष्ठानों का फल मिल गया है। उनका विश्वास पहले से भी ज्यादा मजबूत
हो गया। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी। कुछ समय बाद पति-पत्नी के
बीच विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि इसी मौके का फायदा उठाते हुए वनकर्मी दंपति ने
फिर दावा किया कि परिवार पर किसी ने तंत्र कर दिया है और इस संकट को दूर करने के
लिए फिर से विशेष पूजा करनी पड़ेगी। इसके बाद कथित तौर पर पैसों की मांग का नया
सिलसिला शुरू हो गया। जब आखिरकार दंपति को एहसास हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है,
तब उन्होंने आरोपियों से कहा कि पूजा का सामान वापस ले लें और उनका
पैसा लौटा दें।
लेकिन शिकायत के अनुसार जवाब मिला कि
ताबीज, जड़ी-बूटियां और अन्य सामग्री नक्सली
चमरू और विजय से ली गई थी, इसलिए उसे वापस नहीं किया जा
सकता। यहां तक कहा गया कि चाहें तो उनसे सीधे बात कर लें। इस जवाब के बाद दंपति को
पूरी तरह यकीन हो गया कि वे एक बड़े छल का शिकार हो चुके हैं।
मामला जब महिला आयोग जनसुनवाई में
पहुंचा जिसकी अध्यक्षता किरण मई नायक कर रही थी तो अधिकारियों ने शिकायत को
गंभीरता से लिया। सुनवाई के दौरान वन रक्षक से पूछा गया कि कार खरीदने के लिए क्या
विभाग से अनुमति ली गई थी? मकान
निर्माण के लिए क्या अनुमति ली गई? क्या बैंक से कोई लोन
लिया गया था? लेकिन बताया गया कि इन सवालों का संतोषजनक जवाब
नहीं मिल सका।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि
कथित तौर पर दंपति से लिए गए पैसों से मकान बनाया गया,
पहले एक मारुति कार खरीदी गई और बाद में दूसरी गाड़ी भी खरीदी गई।
इतना ही नहीं, आवेदिका के पति जो तहसील कार्यालय में रीडर के
पद पर कार्यरत हैं और प्रॉपर्टी का काम भी करते हैं, उनसे
जुड़ी कुछ संपत्तियों और दस्तावेजों का भी उल्लेख शिकायत में किया गया।