रायपुर : राज्य शासन द्वारा जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने और आगामी मानसून में अधिकाधिक वर्षा जल संचयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित “मोर गाँव, मोर पानी” महाअभियान को प्रदेशभर में व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जनसहभागिता के माध्यम से जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कर जल सुरक्षा की मजबूत नींव रखी जा रही है।
इसी क्रम में बलरामपुर जिले के
रामचंद्रपुर विकासखंड में जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की गई,
जहां ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और पंचायत स्तरीय अमले के सामूहिक प्रयास से
एक ही दिन में 2000 नग 5 प्रतिशत मॉडल
जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया। यह पहल जल संरक्षण के प्रति समाज की
बढ़ती जागरूकता और सहभागिता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।
अभियान में ग्राम पंचायतों के सरपंच,
सचिव, रोजगार सहायक, आवास
मित्र, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं तथा बड़ी संख्या में
ग्रामीणों ने श्रमदान कर सक्रिय भूमिका निभाई। सामूहिक प्रयासों से निर्मित इन
संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का अधिकतम संचयन संभव होगा, जिससे
भूजल स्तर में सुधार आने के साथ-साथ किसानों और ग्रामीणों को दीर्घकालिक जल
सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
राज्य शासन के मार्गदर्शन में अभियान
के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायतों का क्लस्टर बनाकर नोडल अधिकारियों
की नियुक्ति की गई है। साथ ही निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की
सतत समीक्षा की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, जिससे
अभियान के उद्देश्यों की प्रभावी पूर्ति हो सके।
“मोर गाँव, मोर पानी” महाअभियान केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं
है, बल्कि यह ग्रामीण समुदायों में प्राकृतिक संसाधनों के
संरक्षण, सामुदायिक जिम्मेदारी और सतत विकास के प्रति
जागरूकता बढ़ाने का भी सशक्त माध्यम बन रहा है। राज्य शासन और जिला प्रशासन के संयुक्त
प्रयासों से यह अभियान प्रदेश में जल संरक्षण की नई संस्कृति विकसित करने की दिशा
में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
आगामी मानसून को देखते हुए प्रदेशभर
में जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण, वर्षा
जल संचयन और भूजल संवर्धन संबंधी गतिविधियों को गति दी जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा
सके।