रायपुर : कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन तथा जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में सुकमा जिले में ‘लखपति दीदी’ अभियान के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्य किया जा रहा है। इसी प्रशासनिक पहल का परिणाम है कि अब तक जिले में 5860 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जो आकांक्षी जिला सुकमा के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
इसी सफलता की एक प्रेरणादायक मिसाल
हैं कोंटा विकासखंड के दुब्बाटोटा गांव की निवासी श्रीमती सावलम भीमे,
जो नक्सल प्रभावित क्षेत्र से निकलकर आज आत्मनिर्भरता की नई पहचान
बन गई हैं। कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच संघर्ष करते हुए उन्होंने
यह साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने पर ग्रामीण
महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।
सावलम भीमे लगभग 6
वर्ष पूर्व लिंगेश्वरी महिला स्व सहायता समूह से जुड़ीं, जिसमें 11 महिलाएं शामिल हैं। समूह से जुड़ने के बाद
उन्हें ऋण सुविधा प्राप्त हुई, जिसका उन्होंने आजीविका
गतिविधियों में सही उपयोग किया। वर्तमान में वे पशुपालन, कृषि
और वनोत्पाद आधारित व्यवसाय से जुड़कर आय अर्जित कर रही हैं, साथ ही इमली और महुआ की खरीदी-बिक्री कर नियमित आमदनी प्राप्त कर अपने
परिवार का बेहतर ढंग से पालन-पोषण कर रही हैं।
कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि
जिले में लखपति दीदी अभियान के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में
निरंतर कार्य किया जा रहा है। स्व सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आजीविका के नए
अवसर प्राप्त कर रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। यह सुकमा जिले के लिए
गर्व की बात है कि 5860 महिलाएं
आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होकर लखपति दीदी बन गई हैं।
सावलम भीमे की यह सफलता कहानी बताती
है कि सुकमा प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम केवल योजनाएं
नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन में बदलाव की
मजबूत नींव हैं। आज वे न सिर्फ अपने परिवार के लिए सहारा बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।
लखपति दीदी अभियान के माध्यम से सुकमा प्रशासन जिले में आत्मनिर्भरता, विकास और सामाजिक परिवर्तन की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है।