रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के कवर्धा परियोजना मंडल द्वारा वनों को आग से बचाने के लिए आधुनिक तकनीक और त्वरित कार्रवाई की प्रभावी व्यवस्था लागू की गई है। लगभग 25 हज़ार 436 हेक्टेयर वन क्षेत्र, जो 25 बीटों में विभाजित है, की सुरक्षा के लिए ‘फायर अलर्ट’ सिस्टम सक्रिय किया गया है।
तकनीक से त्वरित सूचना
और कार्रवाई
वन विभाग द्वारा एफएमआईएस (Forest
Management Information System) पोर्टल के माध्यम से सभी मैदानी
अधिकारियों और कर्मचारियों के मोबाइल नंबर दर्ज किए गए हैं। जैसे ही किसी क्षेत्र
में आग लगती है, संबंधित कर्मचारियों को तुरंत अलर्ट संदेश
मिल जाता है। इससे मौके पर मौजूद टीम तत्काल पहुंचकर आग पर नियंत्रण पा लेती है।
मानव संसाधन और आधुनिक
साधनों का उपयोग
वनों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के
लिए प्रत्येक बीट में अग्नि सुरक्षा श्रमिकों की नियुक्ति की गई है,
जो पूरे फायर सीजन में सक्रिय रहते हैं। इसके साथ ही संवेदनशील
क्षेत्रों में पहले से फायर लाइन तैयार की गई है। सभी परिक्षेत्रों में फायर
ब्लोअर जैसे आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। त्वरित प्रतिक्रिया के लिए क्विक
रिस्पॉन्स टीम (QRT) गठित की गई है l
सोशल मीडिया और
जनसहभागिता का सहयोग
अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच
समन्वय के लिए सोशल मीडिया समूह बनाए गए हैं, जिससे
आग की सूचना तुरंत साझा की जा सके। साथ ही, वन क्षेत्र के
आसपास रहने वाले ग्रामीणों को जागरूक कर उनकी सहभागिता भी सुनिश्चित की जा रही है।
पारदर्शिता के लिए
फीडबैक तंत्र
अग्नि नियंत्रण के बाद पूरी जानकारी
विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज की जाती है, जिससे
कार्यों में पारदर्शिता बनी रहती है।
अग्नि घटनाओं पर प्रभावी
नियंत्रण
विभाग की सतर्कता और ग्रामीणों के
सहयोग का ही परिणाम है कि मार्च 2026 तक
इस क्षेत्र में केवल 23 अग्नि घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें
से कई घटनाएं राजस्व भूमि और वन अधिकार पत्र वाली जमीन से संबंधित थीं। सभी मामलों
में समय पर कार्रवाई कर आग पर नियंत्रण पाया गया, जिससे वन
संपदा और वन्यजीवों को होने वाली क्षति को काफी हद तक रोका जा सका है।
वन विकास निगम की यह पहल वनों की
सुरक्षा के लिए तकनीक और सामुदायिक सहयोग का एक सफल उदाहरण बनकर सामने आई है।