ग्रामीणों के लिए मीना बाजार प्रवेश शुल्क नि:शुल्क किया जाए : नरेंद्र पाणिग्राही
जगदलपुर। ऐतिहासिक बस्तर दशहरा में बस्तर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों लोग शामिल होते हैं। इस पर्व की विशेषता यह है कि इसमें हमारे ग्रामीण क्षेत्रों के आदिवासी भाई-बहन प्रमुख भूमिका निभाते हैं और वे अपने ग्रामों के देवी-देवताओं के साथ पारंपरिक रूप से पर्व में शामिल होकर दशहरे की गरिमा बढ़ाते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र पाणिग्राही ने बताया कि बस्तर दशहरा के महत्वपूर्ण आयोजनों — मावली परघाव, भीतर रैनी और बाहर रैनी जैसे प्रमुख दिवसों पर ग्रामीण भाई-बहनों की सहभागिता सबसे अधिक होती है। लेकिन इस वर्ष मीना बाजार में प्रवेश शुल्क 30 रुपये प्रति व्यक्ति निर्धारित किया गया है, जो ग्रामीण अंचल से आने वाले श्रद्धालुओं और परंपरागत सहभागियों के लिए कठिनाई का कारण बन रहा है। जबकि अन्य शहरों में मीना बाजार में प्रवेश शुल्क नि:शुल्क होता है।
पाणिग्राही ने कहा कि—
“बस्तर दशहरा केवल शहरी उत्सव नहीं, बल्कि यह आदिवासी परंपराओं और ग्रामीण संस्कृति की आत्मा से जुड़ा पर्व है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले भाई-बहनों से मीना बाजार प्रवेश शुल्क लेना उचित नहीं है। विशेष रूप से मावली परघाव, भीतर रैनी और बाहर रैनी जैसे दिवसों पर प्रवेश शुल्क पूर्णतः नि:शुल्क किया जाना चाहिए।”
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि परंपराओं की गरिमा और ग्रामीण सहभागिता को ध्यान में रखते हुए संबंधित दिवसों पर ग्रामीणों के लिए मीना बाजार में प्रवेश पूर्णतः नि:शुल्क किया जाना चाहिए।