July 10, 2025


राष्ट्रव्यापी औद्योगिक हड़ताल में बचेली से उठी जनआवाज़, मजदूरों के संघर्ष ने लिया जनक्रांति का रूप

अरुण शर्मा/संवाददाता

बचेली। देशभर में केंद्र सरकार की मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आयोजित राष्ट्रव्यापी औद्योगिक हड़ताल के तहत बचेली के लाल मैदान में एक ऐतिहासिक एक दिवसीय धरना–प्रदर्शन हुआ। एटक और इंटक के संयुक्त नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों की भारी भागीदारी देखने को मिली, जिसने इस विरोध को एक जनआंदोलन में बदल दिया।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र कर्मचारी महासंघों के आह्वान पर यह हड़ताल पूरे देश में संपन्न हुई। बचेली में इसे संयुक्त खदान मजदूर संघ (एटक) और मेटल माइंस वर्कर्स यूनियन (इंटक) ने नेतृत्व प्रदान किया।

प्रदर्शन की प्रमुख मांगों में चारों लेबर कोड की वापसी, सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण पर रोक, ₹26,000/- न्यूनतम मजदूरी, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, ठेका प्रथा की समाप्ति, समान वेतन, महंगाई पर नियंत्रण और शिक्षा–स्वास्थ्य की निःशुल्क सुविधाएं शामिल थीं।

इस आंदोलन को कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) सहित कई जनसंगठनों का समर्थन प्राप्त हुआ। कांग्रेस नेताओं छविंद्र कर्मा, सलीम राजा उस्मानी, संतोष दुबे, मनोज साहा और कुमार स्वामी झाड़ी ने सरकार की नीतियों को मजदूर विरोधी बताते हुए श्रमिकों के साथ खड़े होने की बात कही। सीपीआई नेताओं बहुलोचन श्रीवास्तव, बोमडा राम और बामन कुंजाम ने इसे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का आंदोलन करार दिया।

धरने में इंटक के सचिव आशीष यादव का भाषण विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें उन्होंने कहा कि “मजदूर का पसीना बिकेगा नहीं, उसका सम्मान खरीदा नहीं जा सकेगा।” वहीं अध्यक्ष चंद्र कुमार मंडावी ने कहा कि “एकता ही हमारी ताकत है, और यही बदलाव की शुरुआत है।

एटक के अध्यक्ष जागेश्वर प्रसाद और कार्यकारी अध्यक्ष रवि मिश्रा ने मंच से स्पष्ट किया कि यह केवल मांगों का आंदोलन नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की चेतावनी है। उनका कहना था कि “सरकार अगर पीड़ा नहीं समझती, तो यह पीड़ा परिवर्तन की आग बन जाएगी। कार्यक्रम के अंत में पूरे मैदान में एक स्वर गूंजा संघर्ष जारी रहेगा।


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