कांकेर : जिले के अंतागढ़ से पूर्व विधायक मंतूराम पवार ने 2023 विधानसभा चुनाव में निर्दलीय मैदान में उतरने का एलान कर दिया है। मंतूराम पवार कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टी में रह चुके हैं और 2014 के उपचुनाव में कांग्रेस से प्रत्याशी बनाए जाने के बाद नाम वापसी के अंतिम दिन उन्होंने नामांकन वापस ले लिया था। इससे प्रदेश की राजनीति गरमा गई थी। फिलहाल मंतूराम बीजेपी और कांग्रेस किसी भी पार्टी में नहीं हैं। मंतूराम पवार ने अब 2023 के विधानसभा चुनाव में अंतागढ़ विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान पखांजूर में प्रेस वार्ता कर किया है। मंतूराम पवार ने कहा कि विधानसभा चुनाव में अंतागढ़ हमेशा से ही चर्चा का विषय बना रहा है, अब आगामी चुनाव के लिए मंतूराम पवार समर्थक दल का गठन हुआ है, जिसमें सभी वर्ग के लोग जुड़े हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव के पहले उनके दल में 15 हजार से अधिक लोग जुड़ जाएंगे। मंतूराम पवार ने कहा कि अंतागढ़ विधानसभा क्षेत्र में नेतृत्व की कमी है, इसलिए अब फिर से अपने क्षेत्र के विकास के लिए वो मैदान में आने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने दोनों प्रमुख पार्टियों पर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में नेतृत्व की कमी है, वहीं भाजपा में गुटबाजी बेहद हावी है। मंतूराम पवार ने आरोप लगाते हुए कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर दोनों ही पार्टी की निष्क्रियता के कारण आज एसटी, एससी और ओबीसी वर्ग को आरक्षण से वंचित होना पड़ रहा है, ऐसे में अब सर्व समाज की तरफ से वो अंतागढ़ विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं और अपने क्षेत्र का विकास और अपने लोगों की हक की लड़ाई लड़ेंगे। जानिए मंतूराम पवार के बारे में मंतूराम पवार 1998 में अंतागढ़ नारायणपुर सीट जब एक हुआ करती थी, तब कांग्रेस के टिकट से चुनाव जीतकर आए थे, फिर उन्हें 2008 और 2013 में भाजपा के प्रत्याशी विक्रम उसेंडी ने हराया था। विक्रम उसेंडी को सांसद का टिकट मिलने पर उपचुनाव में उन्हें कांग्रेस से फिर से प्रत्याशी बनाया गया था। लेकिन उन्होंने नाम वापसी के अंतिम दिन नाम वापस लेकर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया था।