March 02, 2023


15 लाख का लोन चुकाना ही दानीकुंडी स्वसहायता समूह की जीत

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही| जिले के ग्राम दानीकुंडी में वनमंडल मरवाही के सहयोग से महिला स्वसहायता समूह द्वारा विविध सुविधा सह मूल्य संवर्धन केन्द्र का संचालन किया जा रहा है। इस केन्द्र में आइसक्रीम, ढेंकी चावल, तिल,अलसी,सरसों का तेल का उत्पादन, पैकेजिंग और विक्रय किया जा रहा है। इन उत्पादों का बाजार में अच्छी मांग होने से इनका उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। दानीकुंडी के स्व-सहायता समूह ने अपनी अर्जित आय से लोन का 15 लाख रूपए का भुगतान किया है और यही समूह की सफलता और समृद्धि का ग्राफ है, उनकी जीत है। विश्व बैंक के पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं का विकास परियोजना से दानीकुंडी के स्व-सहायता समूह के सदस्यों का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया गया है। केन्द्र में सीताफल, आम, जामुन आदि का आइसक्रीम उत्पादन एवं विक्रय किया जा रहा है। इसे ‘ट्राइबल डिलाईट’ के नाम से रजिस्टर्ड किया गया है। स्व-सहायता समूह ने मशीन आदि के क्रय के लिए लोन लिया हुआ है। इसके अंतर्गत सीताफल से बीज निकालने के लिए 2 लाख रूपए की मशीन, आइसक्रीम निर्माण के लिए 5 लाख रूपए की मशीन और फलों के पल्प का भंडारण के लिए 16 लाख रूपए की मशीन स्थापित की गई है। फ्रीजर एवं भंडारण मशीन के ब्लास्ट फ्रीजर में 1 टन का पल्प और डीप फ्रीजर में 7 टन का पल्प भंडारण किया जा सकता है। इस मशीन में पल्प का संधारण 3 साल तक किया जा सकता है। इस केन्द्र में प्रतिदिन 18 किलोग्राम का आइसक्रीम उत्पादन होता है। मशीन से धान कुटाई के स्थान पर पुरानी पद्धति लकड़ी से निर्मित ढेंकी से धान की कुटाई करके तैयार की गई ढेंकी चावल का बाजार में अच्छी खासी मांग है। कई किस्मों के धान का उनका ढेंकी चावल का उत्पादन, पैकेजिंग और विक्रय किया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग 7 महिला सदस्यों द्वारा ढेंकी चावल तैयार किया जा रहा है। इसी तरह तिल, अलसी और सरसों बीज से तेल उत्पादन किया जा रहा है। बाजार में इस तेल की इतनी मांग है कि उत्पादन से पहले डिमांड समूह को मिलते रहते हैं। प्रतिदिन तेल उत्पादन में लगभग 5 महिला सदस्य कार्य करती है।


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