रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और नवाचार की शक्ति से समृद्ध बनाना राज्य सरकार का संकल्प है। हमारा लक्ष्य छत्तीसगढ़ को केवल औद्योगिक और आर्थिक विकास में ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा, आधुनिक प्रौद्योगिकी और चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्ध खनिज संपदा, ऊर्जा संसाधनों, औद्योगिक संभावनाओं और प्रतिभाशाली मानव संसाधन को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़कर विकास का एक नया अध्याय लिखा जा सकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी
रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी),
बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन एवं संस्थान के वरिष्ठ
वैज्ञानिकों तथा राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक
को संबोधित कर रहे थे। बैठक में छत्तीसगढ़ को विज्ञान, प्रौद्योगिकी,
उच्च शिक्षा, कौशल विकास और चिकित्सा अनुसंधान
के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श
किया गया। इस दौरान भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन
महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर संभावित सहयोग, आवश्यक
वैज्ञानिक अधोसंरचना, संस्थागत व्यवस्थाओं और क्रियान्वयन की
प्रारंभिक रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने भारतीय
विज्ञान संस्थान के निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों का छत्तीसगढ़ आगमन पर आत्मीय
स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान देश ही नहीं,
विश्व के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संस्थानों में शामिल
है। इसकी विशेषज्ञता, अनुसंधान क्षमताओं और शैक्षणिक अनुभवों
का लाभ छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण
संस्थानों, उद्योगों, स्वास्थ्य सेवाओं
और विशेष रूप से युवाओं को मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री
श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी,
अंतरिक्ष अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और
आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। विकसित भारत के
संकल्प को साकार करने में वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी
उत्कृष्टता और उच्च कौशलयुक्त मानव संसाधन की निर्णायक भूमिका होगी। छत्तीसगढ़ भी
इसी राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में तेजी
से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी
विश्वस्तरीय वैज्ञानिक और शैक्षणिक अधोसंरचनाएं विकसित करना चाहती है,
जिनका लाभ केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित न रहे, बल्कि आने वाली अनेक पीढ़ियों को प्राप्त हो। विज्ञान और अनुसंधान में
निवेश प्रदेश के दीर्घकालिक विकास, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और
युवाओं के उज्ज्वल भविष्य में निवेश है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विशेष रूप
से इस बात पर जोर दिया कि भारतीय विज्ञान संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की
विशेषज्ञता का लाभ केवल बड़े शहरों और प्रमुख शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं रहना
चाहिए। बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के
ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ अंचलों में भी प्रतिभाओं की कोई
कमी नहीं है। आवश्यकता इन प्रतिभाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और तकनीकी
प्रशिक्षण के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने संबंधित
विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ
सहयोग की सभी संभावनाओं का गंभीरता से परीक्षण किया जाए। प्रस्तावित परियोजनाओं की
तकनीकी, वित्तीय एवं संस्थागत
व्यवहार्यता का अध्ययन कर ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि इन पहलों को व्यावहारिक स्वरूप दिया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य
सरकार विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार से संबंधित इन महत्वपूर्ण
प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।
तीन महत्वाकांक्षी
परियोजनाओं से तैयार होगा वैज्ञानिक और तकनीकी विकास का नया आधार
बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान और
छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन प्रमुख परियोजनाओं पर सहयोग की संभावनाओं को लेकर
विस्तृत चर्चा हुई। इनमें प्रदेश में विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड
टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना, विज्ञान
एवं गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड
संस्थान का विकास तथा आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के
क्षेत्र में भारतीय विज्ञान संस्थान के मेडिकल स्कूल की विशेषज्ञता का लाभ
छत्तीसगढ़ तक पहुंचाना शामिल है।
इन प्रस्तावित परियोजनाओं के माध्यम
से प्रदेश में अत्याधुनिक वैज्ञानिक अधोसंरचना विकसित करने,
गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने, अनुसंधान आधारित औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने तथा आधुनिक स्वास्थ्य
सेवाओं के विस्तार की संभावनाओं पर विचार किया गया।
विश्वस्तरीय मटेरियल
कैरेक्टराइजेशन एवं टेस्टिंग सेंटर से उद्योगों और अनुसंधान संस्थानों को मिलेगी
नई शक्ति
बैठक में छत्तीसगढ़ में विश्वस्तरीय
मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना के प्रस्ताव पर विशेष
रूप से चर्चा हुई। यह प्रस्तावित केंद्र प्रदेश के खनिज,
इस्पात, धातु, ऊर्जा,
उन्नत विनिर्माण और महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित उद्योगों के लिए
अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज और
औद्योगिक राज्यों में शामिल है। प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का
वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपयोग बढ़ाने, नई
औद्योगिक तकनीकों के विकास और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के लिए उच्चस्तरीय
परीक्षण एवं अनुसंधान सुविधाओं की आवश्यकता है। प्रस्तावित केंद्र इस दिशा में
महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस केंद्र में अत्याधुनिक
माइक्रोस्कोपी, एक्स-रे आधारित विश्लेषण,
उच्च तापमान पर पदार्थों का परीक्षण, नैनो
टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक एवं चुंबकीय पदार्थों का अध्ययन
तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वैज्ञानिक विश्लेषण जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित
करने की परिकल्पना की गई है।
इन सुविधाओं के माध्यम से धातु एवं
मिश्रधातुओं के गुणों का अध्ययन, उन्नत
पदार्थों का परीक्षण, नई विनिर्माण तकनीकों का विकास और
औद्योगिक उत्पादों की गुणवत्ता का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव हो सकेगा। इससे रक्षा,
एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स,
ऊर्जा और अन्य अत्याधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों में भी अनुसंधान एवं
नवाचार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
प्रस्तावित केंद्र में लगभग 600
शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के आवासीय प्रशिक्षण की क्षमता
विकसित करने की परिकल्पना है। इसके माध्यम से तीन वर्षों में लगभग 1,800 विद्यार्थियों को उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान
करने का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है।
इस केंद्र के विकसित होने से
छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग
संस्थानों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों,
स्टार्टअप और औद्योगिक इकाइयों को उच्चस्तरीय परीक्षण एवं अनुसंधान
की सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इससे वैज्ञानिक परीक्षण के लिए विदेशी संस्थानों पर
निर्भरता कम करने, अनुसंधान की लागत और समय में कमी लाने तथा
उद्योगों की तकनीकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि
छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा और औद्योगिक क्षमताओं को वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आधुनिक
तकनीक से जोड़ना प्रदेश के आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाला कदम होगा। इससे
राज्य में अनुसंधान आधारित उद्योगों, तकनीकी
नवाचार और उच्च कौशल वाले रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकेंगे।
विज्ञान एवं गणित के
उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए विशेष संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव
बैठक में प्रदेश में विज्ञान और गणित
शिक्षा की गुणवत्ता में दीर्घकालिक सुधार के उद्देश्य से भारतीय विज्ञान संस्थान
के अकादमिक मार्गदर्शन में चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड पाठ्यक्रम संचालित करने
वाले विशेष संस्थान की स्थापना के प्रस्ताव पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप
प्रस्तावित इस संस्थान का उद्देश्य विज्ञान एवं गणित विषयों में उच्च प्रशिक्षित,
दक्ष और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से परिचित शिक्षकों की नई पीढ़ी
तैयार करना है।
प्रस्तावित पाठ्यक्रम में भौतिकी,
रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित जैसे प्रमुख
विषयों के साथ आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, वैज्ञानिक अनुसंधान,
संचार कौशल, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विकास पर विशेष ध्यान दिया
जाएगा।
संस्थान में 14
आधुनिक शिक्षण प्रयोगशालाएं, 600 विद्यार्थियों
की आवासीय क्षमता, समृद्ध पुस्तकालय, डिजिटल
शिक्षण सुविधाएं, आधुनिक व्याख्यान कक्ष, खेल सुविधाएं तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए आवासीय अधोसंरचना
विकसित करने की परिकल्पना है। यहां 25 पूर्णकालिक शिक्षकों
की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
भारतीय विज्ञान संस्थान द्वारा
पाठ्यक्रम निर्माण, प्रयोगशाला विकास,
शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक गुणवत्ता
सुनिश्चित करने और अनुसंधान संस्कृति को प्रोत्साहित करने में अकादमिक मार्गदर्शन
प्रदान करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि
गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा ही वैज्ञानिक सोच और तकनीकी दक्षता की मजबूत आधारशिला
है। विज्ञान और गणित के विषयों में विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने तथा उन्हें
आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ने के लिए उत्कृष्ट शिक्षकों का होना आवश्यक
है।
उन्होंने कहा कि इस पहल से प्रदेश
में विज्ञान एवं गणित के उच्च प्रशिक्षित शिक्षकों की नई पीढ़ी तैयार करने में
सहायता मिलेगी। इसका सकारात्मक प्रभाव शासकीय विद्यालयों सहित प्रदेश की संपूर्ण
स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण एवं जनजातीय अंचलों
के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में यह
महत्वपूर्ण प्रयास होगा।
चिकित्सा अनुसंधान,
डिजिटल हेल्थ और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों में भी सहयोग की
संभावनाएं
बैठक में तीसरी महत्वपूर्ण पहल के
अंतर्गत भारतीय विज्ञान संस्थान के मेडिकल स्कूल की शैक्षणिक,
वैज्ञानिक और अनुसंधान क्षमताओं का लाभ छत्तीसगढ़ में उपलब्ध कराने
की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
इस प्रस्ताव में किफायती चिकित्सा
जांच तकनीकों, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों,
डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित
स्वास्थ्य सेवाओं, क्लिनिकल रिसर्च और चिकित्सा क्षेत्र में
कुशल मानव संसाधन के विकास को प्राथमिकता दी गई है।
प्रारंभिक चरण में पूर्ण मेडिकल
स्कूल की स्थापना के स्थान पर हब एंड नेटवर्क मॉडल अपनाने की संभावनाओं पर चर्चा
हुई। इस मॉडल के माध्यम से भारतीय विज्ञान संस्थान को छत्तीसगढ़ के अस्पतालों,
मेडिकल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, शासकीय संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों से जोड़कर संयुक्त अनुसंधान एवं
तकनीकी विकास की दिशा में कार्य किया जा सकेगा।
इसके अंतर्गत संयुक्त अनुसंधान
प्रयोगशालाओं की स्थापना, चिकित्सा
तकनीकों के परीक्षण एवं सत्यापन केंद्रों का विकास, फेलोशिप,
विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के
व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया।
बैठक में बताया गया कि बेंगलुरु
स्थित टाटा आईआईएससी मेडिकल स्कूल विज्ञान, इंजीनियरिंग
और चिकित्सा के समन्वय पर आधारित एक महत्वपूर्ण पहल है। इसमें कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी,
अंग प्रत्यारोपण और रोबोटिक सर्जरी जैसे विशेषज्ञ चिकित्सा
क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
इस संस्थान के वैज्ञानिक एवं तकनीकी
अनुभवों का लाभ छत्तीसगढ़ में चिकित्सा अनुसंधान, स्वास्थ्य
सेवाओं की गुणवत्ता और आधुनिक उपचार तकनीकों के विकास में लिया जा सकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि
राज्य सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक सुलभ,
किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। आधुनिक
तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने
में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विशेष रूप से दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों में
चिकित्सा जांच, रोगों की शीघ्र पहचान और आधुनिक स्वास्थ्य
सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए तकनीकी नवाचार उपयोगी सिद्ध होंगे।
बस्तर और सरगुजा के
युवाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि
छत्तीसगढ़ के जनजातीय और ग्रामीण अंचलों में प्रतिभाशाली युवाओं की कोई कमी नहीं
है। आवश्यकता उन्हें राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों से जुड़ने,
आधुनिक प्रयोगशालाओं में प्रशिक्षण प्राप्त करने और वैज्ञानिक
अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने की है।
बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान की
विशेषज्ञता से प्रदेश के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को वैज्ञानिक
मार्गदर्शन, ग्रीष्मकालीन एवं
शीतकालीन अनुसंधान इंटर्नशिप, आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों का
प्रशिक्षण और विशेषज्ञ वैज्ञानिकों के व्याख्यान उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर
चर्चा हुई।
सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी,
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जैव प्रौद्योगिकी,
बुनियादी विज्ञान और अन्य उभरती तकनीकों में विशेष प्रशिक्षण
कार्यक्रम विकसित करने पर भी विचार किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन अवसरों से
शासकीय शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों तथा ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों के
युवाओं को प्राथमिकता के साथ जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बस्तर और सरगुजा
के प्रतिभाशाली युवा भी देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों में अनुसंधान करें,
नई तकनीकों का विकास करें और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर
अपनी पहचान बनाएं, यह राज्य सरकार की आकांक्षा है।
बस्तर और सुकमा में जल
संरक्षण तथा स्थानीय तकनीकी नवाचार की संभावनाओं पर चर्चा
बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान
द्वारा जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और
स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग पर भी
विचार-विमर्श किया गया।
भारतीय विज्ञान संस्थान के
वैज्ञानिकों ने बस्तर और सुकमा सहित विभिन्न क्षेत्रों में बिजली के बिना जल
प्रवाह की ऊर्जा से संचालित पंपिंग तकनीकों के उपयोग संबंधी कार्यों की जानकारी
दी।
हाइड्रोलिक रैम एवं टरबाइन पंपों पर
आधारित ये तकनीकें विशेष रूप से दूरस्थ वनांचलों में उपयोगी हो सकती हैं,
जहां पारंपरिक विद्युत आधारित जलापूर्ति व्यवस्थाओं के संचालन में
कठिनाइयां आती हैं। स्थानीय जलस्रोतों और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप इन
तकनीकों का उपयोग जल उपलब्धता बढ़ाने तथा ग्रामीण समुदायों की आवश्यकताओं की
पूर्ति में सहायक हो सकता है।
इसके अतिरिक्त शोधित जल के
पुनर्चक्रण, जलाशयों के पुनर्भरण और
भूजल संवर्धन के क्षेत्र में भारतीय विज्ञान संस्थान के अनुभवों पर भी चर्चा हुई।
इस दौरान कर्नाटक के कोलार जिले में
प्रतिदिन 440 मिलियन लीटर शोधित जल
को 137 जलाशयों तक पहुंचाने वाली परियोजना का उदाहरण
प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार के वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचारों की उपयोगिता का
अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, जल प्रबंधन और स्थानीय
आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि
वैज्ञानिक अनुसंधान की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब
उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विज्ञान और तकनीक का उपयोग ग्रामीण
जीवन को सुगम बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और
स्थानीय समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए भी किया जाना चाहिए।
विकसित छत्तीसगढ़ के
निर्माण में विज्ञान, शिक्षा,
उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं का समन्वय आवश्यक
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने
कहा कि छत्तीसगढ़ के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए शिक्षा,
विज्ञान, अनुसंधान, उद्योग,
कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़कर आगे बढ़ाना
आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान
संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ सहयोग से प्रदेश में आधुनिक वैज्ञानिक
अधोसंरचना विकसित करने, उच्चस्तरीय अनुसंधान
को बढ़ावा देने, उद्योगों की तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने
और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार
चाहती है कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की पहचान केवल खनिज संपदा और प्राकृतिक
संसाधनों से समृद्ध राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि
ज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी
नवाचार और उत्कृष्ट मानव संसाधन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी स्थापित हो।
उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ 2047
के संकल्प को साकार करने में विज्ञान और नवाचार की महत्वपूर्ण
भूमिका होगी। भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ प्रस्तावित सहयोग प्रदेश की वैज्ञानिक
और तकनीकी क्षमताओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल
साबित हो सकता है।
बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान,
बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन, प्रशासन
एवं वित्त संकाय के डीन प्रोफेसर पी.एस. अनिल कुमार, मैकेनिकल
साइंसेज डिवीजन के डीन प्रोफेसर सत्यम सुवास तथा बायोलॉजिकल साइंसेज डिवीजन के डीन
प्रोफेसर सतीश राघवन शामिल हुए।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन की नई
दिल्ली में पदस्थ निवेश आयुक्त सुश्री ऋतु सेन, मुख्यमंत्री
के सचिव श्री राहुल भगत, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री
अविनाश चंपावत, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया,
कौशल विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजू सहित संबंधित विभागों के
वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।