October 13, 2026


नक्सल सरेन्डर : 35 लाख के इनामी 6 नक्सलियों ने छोड़ी हिंसा, ओडिशा से जुड़े तार

बीजापुर. रायपुर. छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली है. पश्चिम बस्तर डिवीजन और पड़ोसी राज्य ओडिशा में लंबे समय से सक्रिय रहे 6 कुख्यात माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता हमेशा के लिए छोड़कर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है. इन सभी पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था.

इस आत्मसमर्पण की सबसे बड़ी खास बात यह है कि इसमें सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि ओडिशा राज्य में सक्रिय 4 माओवादी कैडर भी शामिल हैं, जो कंपनी नंबर-08 और शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा में तैनात थे.

ओडिशा तक फैला नेटवर्क और शीर्ष कमांडरों की सुरक्षा का अंत

इस बार के आत्मसमर्पण ने माओवादियों के अंतर-राज्यीय नेटवर्क (छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर) की पोल खोल दी है. आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल सुक्कू कुड़ियम ओडिशा राज्य के सीसी स्टाफ (CC Staff) का सुरक्षा गार्ड था और उसके पास खतरनाक एके-47 हथियार रहता था. वहीं, रानी सोढ़ी और देवे मड़कम ओडिशा के शीर्ष माओवादी नेता और SZCM जगदीश इरपा उर्फ रमन्ना के सुरक्षा दस्ते में शामिल रह चुके हैं.

दशकों पुराना सफर और बड़े हमलों में संलिप्तता

 कोसा माड़वी उर्फ सतीश (PPCM): यह साल 2005 से सक्रिय था और वर्ष 2006 के NMDC CISF कैंप हमले के अलावा चर्चित तेकुलगुड़ा कैंप हमले (2024) जैसी बड़ी घटनाओं में शामिल रहा है. स्वास्थ्यगत कारणों से वह पिछले कुछ समय से संगठन से फरार चल रहा था.

 रानी सोढ़ी उर्फ संध्या (PPCM): वर्ष 2012 से बाल संगम से शुरुआत करने वाली रानी अप्रैल 2018 में ओडिशा में मतदान दल पर हुए हमले में शामिल थी, जिसमें 2 पुलिस जवान शहीद हुए थे. इस वर्ष जनवरी में ओडिशा के कोनारी जंगल में हुई मुठभेड़ में वह खुद भी घायल हुई थी.

 लालू ताती (PM): गंगालूर एरिया कमेटी और बटालियन नंबर-01 का यह सदस्य तेकुलगुड़ा और  एलमागुंडा कैंप पर हुए कई हमलों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है.

मुख्यधारा में लौटने की नई राह

पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे संपर्क अभियानों, बीजापुर में हो रहे विकास कार्यों और छत्तीसगढ़ शासन की नुकसानरहित पुनर्वास एवं कौशल विकास नीति से प्रभावित होकर इन्होंने यह कदम उठाया है. 


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