रायपुर : घर की रसोई में तैयार होने वाले पापड़, बड़ी और बिजौड़ी अब जांजगीर-चांपा जिले की सुश्री रीना बघेल के लिए केवल घरेलू उपयोग की चीजें नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन गए हैं। जिले के ग्राम कुथुर निवासी रीना ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर अपने पारंपरिक हुनर को स्वरोजगार में बदल दिया है। घर पर ही पापड़, बड़ी और बिजौड़ी तैयार कर उनकी बिक्री से वे अब परिवार की आमदनी बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।
रीना की यह पहल बताती है कि स्वरोजगार शुरू करने के
लिए हमेशा बड़े संसाधनों या अलग व्यावसायिक परिसर की आवश्यकता नहीं होती। सही अवसर, मेहनत और अपने हुनर पर भरोसा हो तो घर की रसोई भी आजीविका का आधार बन सकती
है।
बिहान से मिला अवसर, घरेलू हुनर बना कमाई का जरिया
सुश्री रीना बघेल पहले अपने परिवार की घरेलू
जिम्मेदारियों में व्यस्त रहती थीं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से
जुड़ने के बाद उन्हें अपने हुनर के माध्यम से घर से ही आजीविका गतिविधि शुरू करने
का अवसर मिला। उन्होंने छोटे स्तर पर पापड़, बड़ी और बिजौड़ी
तैयार कर उनकी बिक्री शुरू की।
धीरे-धीरे उनके बनाए उत्पादों की बिक्री बढ़ने लगी और
यह काम नियमित आमदनी का माध्यम बन गया। घर पर ही उत्पादन करने से उन्हें घरेलू
जिम्मेदारियां निभाने के साथ आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिला।
आज वे अपनी मेहनत से कमाई कर परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर
रही हैं।
“घर की जिम्मेदारियों के साथ अपनी कमाई
भी कर पा रही हूं”
सुश्री रीना बताती हैं कि घर से ही पापड़, बड़ी और बिजौड़ी बनाने का काम शुरू करने से उन्हें अपनी पसंद का काम करने और
परिवार की आय में योगदान देने का अवसर मिला है। वे घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के
साथ अपने उत्पाद तैयार करती हैं और उनकी बिक्री से आमदनी अर्जित करती हैं।
अपने हाथों से बनाए उत्पादों की बिक्री और उससे होने
वाली कमाई ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया है। अब वे स्वयं को आर्थिक रूप से अधिक
सक्षम महसूस करती हैं। उनके लिए यह काम केवल आय का साधन नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और हुनर से अलग पहचान बनाने का अवसर भी है।
महिला स्वावलंबन की मिसाल बनीं
रीना
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से
ग्रामीण महिलाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की
दिशा में कार्य किया जा रहा है। स्व-सहायता समूहों और स्वरोजगार गतिविधियों से
जुड़कर महिलाएं अपने पारंपरिक कौशल का उपयोग आय अर्जित करने में कर रही हैं।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सुश्री रीना बघेल की
यह ‘सेवा की कहानी’ ग्रामीण महिलाओं के
लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने साबित किया है कि घर की चारदीवारी के भीतर
मौजूद हुनर भी आर्थिक आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बन सकता है। पापड़, बड़ी और बिजौड़ी बनाने का छोटा सा काम आज उनके लिए नियमित आमदनी, आत्मविश्वास और परिवार की आर्थिक मजबूती का सहारा बन गया है।