रायपुर : छत्तीसगढ़ के हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट एवं अपैरल क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों और संस्थाओं को निर्यात के लिए प्रोत्साहित करने तथा उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से बुधवार को राजधानी रायपुर के सर्किट हाउस, सिविल लाइन्स स्थित कन्वेंशन हॉल में में एक दिवसीय निर्यात संवर्धन एवं डिजाइन विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया।कार्यशाला में हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट एवं अपैरल क्षेत्र में निर्यात की संभावनाओं, निर्यात प्रक्रिया, निर्यात लाइसेंस, वित्तीय सहायता, क्रेडिट गारंटी तथा पारंपरिक डिजाइनों को आधुनिक स्वरूप देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी गई।
कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए
हथकरघा संघ के अध्यक्ष श्री भोजराज देवांगन ने कहा कि प्रदेश के शिल्पियों द्वारा
तैयार कलात्मक उत्पादों में छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और कला की विशिष्ट पहचान
दिखाई देती है। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प
और स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। इस कार्यशाला
का प्रमुख उद्देश्य ‘लोकल फॉर वोकल’ की
भावना को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय हस्तशिल्प उत्पादों को राष्ट्रीय एवं
अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है।
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्री
राजेश सिंह राणा ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ के बुनकरों एवं
शिल्पकारों के उत्पादों को निर्यात के लिए तैयार कर उन्हें स्थानीय से वैश्विक
बाजार तक पहुंचाना है। छत्तीसगढ़ से स्थानीय हस्तशिल्प एवं हथकरघा उत्पादों का
लगभग 47 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है।
आगामी तीन वर्षों में इसे बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये तक
पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।इस कार्यशाला के माध्यम से कोसा-सिल्क, हथकरघा, हस्तशिल्प एवं माटीकला उत्पादों को
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के साथ नए उद्यमियों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं, को निर्यात क्षेत्र से
जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने उद्यमियों को
निर्यात प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों के
समन्वय से हरसंभव सहयोग देने की बात कही।
कार्यशाला में तकनीकी सत्र में
डीजीएफटी नागपुर के संयुक्त निदेशक एवं उद्योग विभाग के अधिकारियों द्वारा
छत्तीसगढ़ में हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट एवं
अपैरल क्षेत्र में निर्यात की संभावनाओं के साथ निर्यात प्रक्रिया और निर्यात
लाइसेंस संबंधी जानकारी दी। इसके बाद एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ
इंडिया के शाखा प्रबंधक ने निर्यातकों के लिए उपलब्ध क्रेडिट गारंटी एवं अन्य
सुविधाओं की जानकारी दी।
कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की औद्योगिक
नीति के प्रावधानों के तहत उपलब्ध सहायता के संबंध में उद्योग विभाग द्वारा
जानकारी दी। वहीं एमएसएमई मंत्रालय की ओर से हैंडलूम,
हैंडीक्राफ्ट एवं अपैरल क्षेत्र के लिए संचालित विभिन्न सहायता
योजनाओं और सुविधाओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया।डिजाइन विकास पर आयोजित
विशेष सत्र में एनआईएफ़टी रायपुर के संयुक्त निदेशक द्वारा टिकाऊ हैंडलूम एवं
हस्तशिल्प उत्पादों के लिए डिजाइन नवाचार के महत्व पर जानकारी दी। उन्होंने बाजार
की बदलती मांग के अनुरूप उत्पादों के डिजाइन, उपयोगिता और
प्रस्तुतीकरण में नवाचार की आवश्यकता बताई।
कार्यशाला के अंतिम तकनीकी सत्र में
खैरागढ़ स्थित कला-संगीत विश्वविद्यालय की राजकुमारी इंदिरा सिंह द्वारा ‘पारंपरिक डिजाइनों का आधुनिक रूपांतरण’ विषय पर
मार्गदर्शन दिया गया। इसमें पारंपरिक कला, शिल्प और स्थानीय
डिजाइन की मौलिकता को बनाए रखते हुए उन्हें समकालीन बाजार की जरूरतों के अनुरूप
विकसित करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।कार्यशाला के समापन अवसर पर
प्रतिभागियों से फीडबैक एवं विचार लिए गए। आयोजन का उद्देश्य प्रदेश के बुनकरों,
शिल्पकारों, उद्यमियों एवं संबंधित संस्थाओं
को निर्यात की प्रक्रिया और उपलब्ध सरकारी सहायता की जानकारी देकर छत्तीसगढ़ के
पारंपरिक उत्पादों की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच बढ़ाना है।इस
अवसर पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सहित ग्रामोद्योग से
संबंधित व्यवसायी, बुनकर आदि उपस्थित रहे ।