रायपुर : दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में जावंगा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी आज जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल, खेल और आत्मविश्वास का बड़ा केंद्र बन चुकी है। इस एजुकेशन सिटी ने हिंसा और गरीबी से जूझते जनजातीय बच्चों की किस्मत ही बदल दी। कभी दूरस्थ गांवों के बच्चों के सामने सुरक्षित शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर की बड़ी चुनौती थी।
आज यहां की बेटियां नीट पास कर डॉक्टर बनने की राह पर
हैं, युवा एसएंडपी ग्लोबल जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियों में नौकरी
कर रहे हैं और खिलाड़ी मैदान परअपनी प्रतिभा निखार रहे हैं। यह उन बच्चों की कहानी
है, जिन्होंने हर चुनौती को मात देकर खुद को साबित किया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के जावंगा (एजुकेशन
सिटी) में 9 मई 2015 को आए थे, जहाँ उन्होंने एजुकेशन सिटी का निरीक्षण किया था और छात्रों से बातचीत की
थी।
150 एकड़ में फैला सपनों का शहर
अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी छत्तीसगढ़ सरकार की
महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल है।यहां स्कूल शिक्षा, आवासीय शिक्षा,
कौशल प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा से जुड़े विभिन्न संस्थान संचालित
हैं। यह एजुकेशन सिटीशैक्षिक गतिविधियों तक ही सीमित नहीं है, यहएक पूरी दुनिया है। करीब 150 एकड़ में फैले इस
परिसर में 43 शैक्षणिक और आवासीय संस्थाएं चल रही हैं। यहां 7,436
विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जिनमें 4,692 बालिकाएं शामिल हैं।
इनमें से 5,370 बच्चे यहीं
छात्रावासो में रहकर पढ़ाई करते हैं। दूर-दराज के जंगलों और गांवों से आए इन
बच्चों को सुरक्षित घर, खाना, पढ़ाई और
मार्गदर्शन सब कुछ एक ही छत के नीचे मिल रहा है।इसकी वजह से स्कूल ड्रॉप-आउट की दर
50% से घटकर महज 13% रह गई है। वो बेटियां जिनके गांवों में कभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं था,
आज उन्हीं इलाकों की बेटियां नीट-यूजी पास कर डॉक्टर बनने की कतार
में खड़ी हैं। छू लो आसमान कन्या आवासीय कोचिंग सेंटर, कारली
की कई छात्राओं ने इस साल नीट-यूजी में सफलता पाई है।
इन्हें राज्य के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, आयुर्वेद, दंत चिकित्सा और पशु चिकित्सा में दाखिला
मिला है। परीक्षा पास करने के साथ ही यह उन परिवारों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है,
जिन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनकी बेटी 'डॉक्टर
बेटी' कहलाएगी।
डिजिटल क्रांति की नई कहानी
डिजिटल शिक्षा की दिशा में यहां के नवगुरुकुल का
प्रयास भी प्रेरक है। यहां युवाओं को आधुनिक डिजिटल कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा
रहा है। इस केंद्र से प्रशिक्षित लगभग 100 युवा डेटा
एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार
प्राप्त कर चुके हैं।
नवगुरुकुल की एक छात्रा का चयन एसएंडपी ग्लोबल में
डेटा एनालिटिक्स के पद पर हुआ है। यह उपलब्धि बताती है कि बस्तर की प्रतिभा अब देश
की बड़ी कंपनियों तक पहुंच रही है। आईटीआई में डीजल मैकेनिक, फिटर, वेल्डर और इलेक्ट्रिकल जैसे ट्रेड में
प्रशिक्षण लेने वाले 95 फीसदी छात्र जनजातीय समुदाय से हैं।
मैदान में निखर रही खेल प्रतिभाएं
एजुकेशन सिटीमें पढ़ाई के साथ खेल प्रतिभाओं को भी
निखारा जा रहा है। यहां के 'एकलव्य खेल परिसर'
में ओलंपिक स्तर का स्विमिंग पूल, हॉर्स राइडिंग,
तीरंदाजी और इंडोर स्टेडियम जैसी बेहतरीन सुविधाएं मौजूद हैं।'खेलो इंडिया' से जुड़े इस परिसर में करीब 4,000
आदिवासी बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं। ये बच्चे सिर्फ खेल नहीं सीख
रहे, बल्किइनमें अनुशासन, आत्मविश्वास
और जीतने का जज्बा पैदा हो रहा है।
बेटियों की पढ़ाई को पहली
प्राथमिकता
जावंगा एजुकेशन सिटी की सबसे बड़ी खूबी बालिका शिक्षा
पर विशेष ध्यान है। यहां कन्या विद्यालयों और छात्रावासों के जरिए ग्रामीण बेटियां
सुरक्षित माहौल में पढ़ रही हैं।'स्वामी आत्मानंद
स्कूल' में लगभग 1200 छात्राएं कला,
विज्ञान और वाणिज्य की उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। यहां
बेहतरीन आवास, भोजन, लाइब्रेरी और लैब
जैसी सुविधाओं ने अभिभावकों का भरोसा जीता है। इससे दूरस्थ गांवों की उन बेटियों
के सपने सच हो रहे हैं, जिन्हें पहले पढ़ाई के अवसर नहीं
मिलते थे।
दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा
जैसे इलाके जो कभी नक्सल प्रभावित थे, वहां के अनाथ और हिंसा
पीड़ित बच्चों को आस्था विद्या मंदिर ने नया घर दिया है। यहां दाखिला मेरिट से
नहीं, बच्चे की जरूरत और हालात देखकर होता है। इन बच्चों को
सुरक्षित छत, पढ़ाई, खेल, संगीत और खुशहाल बचपन मिल रहा है। बंदूकों की गूंज के बीच पले-बढ़े ये
बच्चे अब किताबों की दुनिया में अपनी नई पहचान बना रहे हैं।
इस मॉडल को सबने सराहा
जावंगा एजुकेशन सिटी की कामयाबी को अंतरराष्ट्रीय
स्तर पर भी सराहा गया है। प्रतिष्ठित संस्था केपीएमजी ने इसे दुनिया की 100 सबसे बेहतरीन (नवोन्मेषी) परियोजनाओं में शामिल किया है, जिसमें पूरे भारत से मात्र 6 प्रोजेक्ट चुने गए हैं।
इस अनूठी पहल के लिए दंतेवाड़ा प्रशासन को 'प्रधानमंत्री
उत्कृष्टता पुरस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है। इस
शिक्षा मॉडल की सफलता से प्रभावित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी जावंगा का दौरा कर इसकी प्रशंसा कर चुके हैं।जावंगा
एजुकेशन सिटी आज आदिवासी बच्चों के सपनों का परिसर बन गया है।