रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा के निवास पर आयोजित तीज मिलन समारोह में शामिल हुए। पारंपरिक उल्लास और आत्मीय वातावरण में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने माताओं-बहनों से भेंट कर उन्हें तीज पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं में मातृशक्ति का विशेष स्थान है। माताओं-बहनों का सम्मान, उनकी सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री श्री
साय ने कहा कि तीज का पर्व हमारी समृद्ध संस्कृति,
पारिवारिक मूल्यों और आत्मीय रिश्तों से जुड़ा हुआ है। भगवान शिव और
माता पार्वती की आराधना का यह पर्व परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की मंगलकामना
का अवसर है। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की सभी माताओं-बहनों और
उनके परिवारों के सुखी, समृद्ध और स्वस्थ जीवन की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीज का पर्व
भले ही संपन्न हो चुका है, लेकिन
आज इतनी बड़ी संख्या में माताओं-बहनों के बीच तीज मिलन का अवसर अत्यंत सुखद और
आत्मीय है। मुख्यमंत्री निवास में भी तीज के अवसर पर प्रदेशभर से आई बहनों के साथ
पर्व का उल्लास साझा करने का अवसर मिला था। हमारी परंपराओं की यही खूबसूरती है कि
वे हमें परिवार और समाज से जोड़ती हैं तथा आपसी प्रेम और आत्मीयता को मजबूत करती
हैं।
सनातन
संस्कृति में मातृशक्ति को मिला है सर्वोच्च सम्मान
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि
भारतीय सनातन संस्कृति में आदिकाल से मातृशक्ति को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है।
हमारे वेदों, पुराणों और सामाजिक
परंपराओं में नारी के सम्मान और उसकी गरिमा का संदेश निहित है। हमारी संस्कृति
कहती है - “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”,
अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहां
देवताओं का वास होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक मां परिवार
की पहली शिक्षक और संस्कारों की आधारशिला होती है। माताओं-बहनों के परिश्रम,
त्याग और आशीर्वाद से ही परिवार मजबूत होता है और मजबूत परिवार से
सशक्त समाज तथा समृद्ध प्रदेश का निर्माण होता है। इसलिए राज्य सरकार महिलाओं को
केवल योजनाओं का हितग्राही नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के
निर्माण में बराबर का सहभागी मानकर कार्य कर रही है।
महतारी
वंदन योजना ने बढ़ाया बहनों का आत्मविश्वास
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि
महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम
बनी है। योजना के अंतर्गत 68 लाख से
अधिक महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपए की राशि सीधे अंतरित की जा
रही है। अब तक 31 किस्तों के माध्यम से 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि हितग्राही महिलाओं के खातों में पहुंचाई
जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि इस योजना से
माताओं-बहनों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव उन्हें विशेष संतोष देता है। बहनें
इस राशि का उपयोग अपनी और परिवार की आवश्यकताओं के साथ बच्चों की पढ़ाई,
बचत और छोटे-छोटे स्वरोजगार के लिए भी कर रही हैं। कोई बहन सुकन्या
समृद्धि योजना में राशि जमा कर बेटी का भविष्य संवार रही है तो कोई सिलाई मशीन
खरीदकर अपने हुनर को आजीविका में बदल रही है। यह आर्थिक संबल महिलाओं के
आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का
प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक महिला को आगे बढ़ने के लिए अवसर,
संसाधन और आवश्यक सहयोग मिले। जब हमारी माताएं-बहनें आर्थिक रूप से
सशक्त होंगी, तो परिवार मजबूत होगा और पूरे प्रदेश की प्रगति
को नई गति मिलेगी।
13.85
लाख लखपति दीदियां बनीं महिला सशक्तिकरण की नई पहचान
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि
महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं,
बल्कि माताओं-बहनों को स्थायी आजीविका, कौशल
और स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है। प्रदेश में अब तक 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह
बदलते और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की सुखद तस्वीर है।
उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों
से जुड़ी महिलाएं आज विभिन्न आर्थिक गतिविधियों और छोटे व्यवसायों के माध्यम से
अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं। अनेक महिलाएं महतारी वंदन योजना से मिले आर्थिक
संबल और बैंकिंग सुविधाओं का उपयोग करते हुए स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही
हैं। महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी न केवल परिवारों को समृद्ध बना रही है,
बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है।
छत्तीसगढ़
की कला-संस्कृति को देश-दुनिया में मिलेगी नई पहचान
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि
छत्तीसगढ़ अपनी विशिष्ट लोककला, संस्कृति,
परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। यहां की
सांस्कृतिक विरासत हमारी पहचान और हमारी ताकत है। इसे सहेजने के साथ नई पीढ़ी और
देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में फिल्म
निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगभग 650 करोड़
रुपए की लागत से फिल्म सिटी तैयार की जा रही है। इससे छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण
और शूटिंग की संभावनाओं का विस्तार होगा। स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों
और युवाओं के लिए रोजगार तथा प्रतिभा प्रदर्शन के नए अवसर तैयार होंगे और प्रदेश
के पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की
लोककला और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में कलाकारों का अमूल्य योगदान है। हमारे
कलाकार अपनी प्रतिभा के माध्यम से छत्तीसगढ़ की मिट्टी की सुगंध और यहां की
परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। राज्य सरकार कलाकारों और सांस्कृतिक
प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहेगी।
बुनियादी
सुविधाओं के विस्तार से बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर
मुख्यमंत्री श्री साय ने विधानसभा
अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके 15
वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश में सड़क, बिजली,
पेयजल और खाद्य सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा
में व्यापक कार्य हुए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को प्रभावी बनाकर जरूरतमंद
परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने की मजबूत व्यवस्था विकसित की गई, जिसके कारण डॉ. रमन सिंह को प्रदेश में ‘चाउंर वाले
बाबा’ के नाम से भी पहचान मिली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर
जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रही हैं। गरीब,
किसान, महिला, युवा और
वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री
श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनकल्याण और विकास को मिली नई गति
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका
विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ विकसित भारत के
संकल्प की दिशा में आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ भी विकसित भारत के निर्माण में अपनी
सशक्त भूमिका निभाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 18
लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई है और प्रतिदिन लगभग 1600
आवासों का निर्माण किया जा रहा है। गांवों तक आवास, पेयजल, बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने
के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कोरोना महामारी के
कठिन समय का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने स्वदेशी स्तर पर वैक्सीन विकसित कर
अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ अनेक देशों की भी सहायता की।
उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को भगवान
विश्वकर्मा जयंती और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर
छत्तीसगढ़वासियों ने अपने घरों में दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री के प्रति अपना
स्नेह और शुभकामनाएं व्यक्त कीं। मुख्यमंत्री ने इसमें उत्साहपूर्वक सहभागी बनने
के लिए प्रदेश की माताओं-बहनों और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
शांति,
विश्वास और विकास के साथ आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय
गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों के साहस
और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से छत्तीसगढ़ ने नक्सलवाद के विरुद्ध महत्वपूर्ण
सफलता प्राप्त की है। जिन क्षेत्रों में कभी भय और हिंसा विकास की राह में बाधा थे,
वहां आज शांति और विश्वास के साथ विकास के नए अवसर तैयार हो रहे
हैं।
उन्होंने कहा कि प्रकृति ने
छत्तीसगढ़ को वन संपदा, वनोपज, खनिज संसाधनों और उपजाऊ कृषि भूमि से समृद्ध बनाया है। इन संसाधनों का
जनहित में बेहतर उपयोग करते हुए प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना सरकार
का संकल्प है। विकसित छत्तीसगढ़ की इस यात्रा में माताओं-बहनों की सहभागिता,
उनका परिश्रम और आशीर्वाद अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राजस्व
मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने लोकगीत से किया माताओं-बहनों का अभिनंदन
राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने
कहा कि तीज के अवसर पर माताओं-बहनों का अपने निवास पर अभिनंदन करना उनके लिए
सौभाग्य का विषय है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति ने इस आयोजन को
और भी विशेष बना दिया है।
श्री वर्मा ने अपने जीवन के संघर्षों
को याद करते हुए कहा कि जब वे आठवीं कक्षा में पढ़ते थे,
तब पहली बार उनके गांव में बिजली पहुंची थी और गांव तक सड़क भी नहीं
थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 के बाद प्रदेश के गांवों में
बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों का तेजी से विस्तार हुआ। आज मुख्यमंत्री श्री
विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास और खुशहाली की दिशा में आगे बढ़
रहा है। किसान परिवार के बेटे के रूप में प्रदेश सरकार में मंत्री बनकर जनता की
सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री श्री
टंकराम वर्मा ने छत्तीसगढ़ी लोकगीत प्रस्तुत कर माताओं-बहनों का अभिनंदन किया।
उनकी प्रस्तुति से समारोह में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और तीज पर्व का उल्लास और भी
जीवंत हो उठा।
लोक
कला-संस्कृति को समृद्ध करने वाले कलाकारों का सम्मान
समारोह में छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं
संस्कृति को देश-विदेश में पहचान दिलाने वाले कलाकारों को सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कलाकारों को सम्मानित करते हुए उनके योगदान की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की
सांस्कृतिक पहचान को सहेजने, संवर्धित
करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारी लोककला,
लोकगीत, लोकनृत्य और परंपराएं केवल सांस्कृतिक
धरोहर नहीं, बल्कि हमारी जड़ों और सामाजिक जीवन की जीवंत अभिव्यक्ति
हैं।
मुख्यमंत्री
ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर मांगी प्रदेश की खुशहाली
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु
देव साय ने राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा के निवास पर विराजित विघ्नहर्ता भगवान
श्री गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने
गणपति बप्पा से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के जीवन में सुख,
शांति और समृद्धि की कामना करते हुए प्रदेश की निरंतर प्रगति और
खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ केश शिल्पी
विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री गौरी शंकर श्रीवास, चर्म
शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष श्री ध्रुव कुमार मिर्धा, छत्तीसगढ़
फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, विधायक श्री
रोहित साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, श्रीमती वीणा सिंह सहित बड़ी संख्या में माताएं-बहनें, कलाकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।