रायपुर : ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में बैंक सखियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड के डोंगरीगुड़ा निवासी श्रीमती ललिता बघेल ऐसी ही प्रेरणादायी बैंक सखी हैं, जिन्होंने बैंकिंग सेवाओं को ग्रामीणों के घर-द्वार तक पहुंचाकर न केवल लोगों की सहूलियत बढ़ाई है, बल्कि वित्तीय समावेशन और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य किया है।
वर्ष 2019 से बैंक सखी के रूप में सेवाएं दे रहीं ललिता बघेल डोंगरीगुड़ा, कलेपाल और बुरंगपाल ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को विभिन्न शासकीय
योजनाओं की राशि का भुगतान उपलब्ध करा रही हैं। उनकी सहज उपलब्धता से दूरस्थ
ग्रामीणों को बैंकिंग कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करने और अनावश्यक समय एवं खर्च
करने से राहत मिली है।
चार करोड़ से अधिक का
भुगतान, हजारों
ग्रामीणों को सीधा लाभ
ललिता बघेल द्वारा ग्रामीणों को
पेंशन, महतारी वंदन योजना की सहायता राशि,
छात्रवृत्ति सहित मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं
एवं सहायिकाओं के मानदेय भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वर्ष 2019
से अब तक वह क्षेत्र के ग्रामीणों को चार करोड़ रुपये से अधिक की
राशि का भुगतान कर चुकी हैं। दूरस्थ वनांचल में बैंकिंग सुविधा का यह स्थानीय
माध्यम ग्रामीणों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हुआ है। बुजुर्गों, महिलाओं और जरूरतमंद हितग्राहियों को अपने गांव के आसपास ही राशि प्राप्त
हो जाने से बैंक तक आने-जाने की परेशानी कम हुई है।
बैंकिंग के साथ लोक सेवा
केंद्र की सेवाएं भी
ललिता की भूमिका केवल बैंकिंग सेवाओं
तक सीमित नहीं है। वह लोक सेवा केंद्र से जुड़ी विभिन्न डिजिटल और शासकीय सेवाएं भी
ग्रामीणों तक पहुंचा रही हैं। इनमें आयुष्मान कार्ड, पैन
कार्ड, श्रम कार्ड, बैंक खाता खोलना,
किसान सम्मान निधि का पंजीयन और एग्रीस्टैक पंजीयन जैसी सुविधाएं
शामिल हैं। इन सेवाओं के स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से ग्रामीणों और किसानों को
दूर स्थित कार्यालयों और बैंकों के चक्कर लगाने से राहत मिल रही है। डिजिटल सेवाओं
के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी ललिता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
ग्रामीणों के बीच बनीं ‘बैंक दीदी’
स्नातक तक शिक्षित ललिता बघेल ने
अपने सेवाभाव और निरंतर प्रयासों से तीन ग्राम पंचायतों की बड़ी आबादी तक बैंकिंग
एवं लोक सेवा केंद्र की सुविधाएं पहुंचाई हैं। ग्रामीणों के बीच उनकी सहज उपलब्धता
और सहयोगी व्यवहार के कारण लोग उन्हें स्नेहपूर्वक ‘बैंक
दीदी’ के नाम से जानते हैं। ललिता बताती हैं कि ग्रामीणों की
मदद करने से उन्हें आत्मिक संतोष मिलता है। ग्रामीणों से मिलने वाला स्नेह और
विश्वास उन्हें अपने कार्य को और बेहतर ढंग से करने की प्रेरणा देता है।
स्वरोजगार के साथ परिवार
को भी दे रहीं आर्थिक सहयोग
बैंक सखी के रूप में ग्रामीणों को
सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ ललिता अपने परिवार के लिए भी आर्थिक सहयोग का माध्यम
बनी हैं। वह अपने पिता श्री सोमारू बघेल की खेती-किसानी में भी आर्थिक सहयोग करती
हैं। उनकी कहानी बताती है कि डिजिटल और वित्तीय सेवाओं के विस्तार ने ग्रामीण
महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी खोले हैं। ललिता स्वयं
आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी
आर्थिक एवं डिजिटल रूप से सक्षम बनाने में योगदान दे रही हैं।