रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में संचालित बाल चौपाल 2.0 अभियान केवल बच्चों की समस्याएं सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी पहल भी कर रहा है। हाल ही में तिल्दा विकासखंड के ग्राम सिनोधा में आयोजित बाल चौपाल 2.0 के दौरान बच्चों ने खुलकर अपने विचार और समस्याएं साझा कीं।
इस अवसर पर अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बच्चों
को बाल श्रम, शिक्षा का अधिकार तथा बाल संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।
संवाद के दौरान बच्चों ने बताया कि उनका एक मित्र, जो अत्यंत
मेधावी छात्र रहा है, पारिवारिक परिस्थितियों के कारण पिछले
लगभग दो वर्षों से बाल श्रम करने को विवश है और इसी वजह से वह शिक्षा के अपने
संवैधानिक अधिकार से वंचित हो गया है।
बच्चों
द्वारा दी गई जानकारी को गंभीरता से लेते हुए डॉ. वर्णिका शर्मा ने बाल चौपाल के
पश्चात संबंधित क्षेत्र का स्वयं भ्रमण किया तथा बालक एवं उसके परिजनों से मुलाकात
कर उनकी परिस्थितियों की जानकारी प्राप्त की। आयोग द्वारा स्थानीय प्रशासन एवं
ग्राम पंचायत के समन्वय से आवश्यक पहल की गई। आयोग की सक्रिय पहल एवं ग्राम पंचायत
के सहयोग से संबंधित बालक तथा उसके बड़े भाई, जो अन्य स्थान पर कार्यरत थे, दोनों
का पुनः विद्यालय में प्रवेश सुनिश्चित कराया गया। वर्तमान में दोनों बच्चे नियमित
रूप से विद्यालय जाकर अपनी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
डॉ.
वर्णिका शर्मा ने कहा कि बाल चौपाल 2.0 का उद्देश्य केवल बच्चों की समस्याओं को सुनना नहीं,
बल्कि उनके समाधान तक पहुंचना है। आयोग 'समस्या
से संवाद, संवाद से समाधान' की
कार्यसंस्कृति पर कार्य करते हुए प्रत्येक बच्चे को उसके अधिकार दिलाने के लिए
प्रतिबद्ध है। यह अभियान केवल संकल्प का नहीं, बल्कि सिद्धि
और सकारात्मक परिवर्तन का अभियान बन चुका है, जिसके माध्यम
से बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी भी
बच्चे के बाल श्रम, शिक्षा से वंचित होने अथवा बाल अधिकारों के उल्लंघन की जानकारी मिले,
तो तत्काल इसकी सूचना संबंधित प्रशासन अथवा आयोग को दें, ताकि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और
शिक्षित भविष्य प्रदान किया जा सके।