रायपुर : छत्तीसगढ़ में बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान को केंद्र में रखकर शुरू किया गया बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अब सामाजिक बदलाव की बड़ी मिसाल बनती जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस अभियान को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन बना दिया है। गांव-गांव में जागरूकता और सामाजिक सहभागिता के जरिए बाल विवाह जैसी कुरीति पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में लगातार ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। 10 मार्च 2024 से शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ बाल विवाह रोकना नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना भी है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती
लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता,
पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षक, मितानिनें और महिला स्व-सहायता समूह लगातार जमीनी स्तर पर लोगों को जागरूक
करने में जुटे हुए हैं। यही वजह है कि अभियान अब प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर
सामाजिक चेतना का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।
राज्य सरकार ने वर्ष 2028-29
तक पूरे छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है।
चरणबद्ध योजना के तहत 2025-26 तक 40 प्रतिशत,
2026-27 तक 60 प्रतिशत, 2027-28 तक 80 प्रतिशत और 2028-29 तक
सभी ग्राम पंचायतों तथा नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की तैयारी
है। अभियान की प्रगति भी उत्साहजनक रही है।
31 मार्च 2026 तक राज्य की 11 हजार 693 ग्राम
पंचायतों में से 7 हजार 498 पंचायतें
बाल विवाह मुक्त घोषित की जा चुकी हैं, जो कुल पंचायतों का
लगभग 64 प्रतिशत है। वहीं 196 नगरीय
निकायों में से 85 निकाय इस श्रेणी में शामिल हो चुके हैं।
राज्य के बालोद जिले ने इस दिशा में
सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए खुद को पूर्णतः बाल विवाह मुक्त घोषित कराया है।
प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से मिली यह सफलता अब दूसरे जिलों के लिए
प्रेरणा बन रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव शिक्षित और
आत्मनिर्भर बेटियां ही होंगी। इसी सोच के साथ सरकार बालिकाओं की शिक्षा,
स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं
को प्राथमिकता के साथ लागू कर रही है।
कम उम्र में विवाह होने से बालिकाओं
की पढ़ाई प्रभावित होती है, स्वास्थ्य
संबंधी जोखिम बढ़ते हैं और उनके भविष्य की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। यही कारण
है कि अभियान के तहत किशोरियों और अभिभावकों को लगातार जागरूक किया जा रहा है ताकि
समाज में स्थायी बदलाव लाया जा सके।
पंचायत आधारित जनभागीदारी,
सतत निगरानी और सामाजिक जागरूकता के प्रभावी मॉडल के कारण बाल विवाह
मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
राज्य सरकार का यह प्रयास केवल एक सामाजिक कुरीति को समाप्त करने तक सीमित नहीं है,
बल्कि यह बेटियों के सम्मान और सशक्तिकरण का व्यापक संकल्प बनकर उभर
रहा है।