March 23, 2026


जीवन प्रकृति पर आधारित,राज्य में वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास : मंत्री केदार कश्यप

वैज्ञानिक तकनीक, वनीकरण के महत्व और भविष्य के लिए वनों के प्रबंधन पर विशेषज्ञों की चर्चा

रायपुर : विश्व वानिकी दिवस 21 मार्च के अवसर पर, वन विभाग और विभिन्न संगठनों द्वारा वन संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरण जागरूकता के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। इन कार्यक्रमों में वैज्ञानिक तकनीक, वनीकरण के महत्व और सतत भविष्य के लिए वनों के प्रबंधन पर विशेषज्ञ चर्चा करते हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप रहे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों का जीवन प्रकृति पर आधारित है और राज्य में वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने वन क्षेत्र में वृद्धि, वन्यजीवों की संख्या में बढ़ोतरी और राज्य की पहली रामसर साइट की उपलब्धि की सराहना की। साथ ही विभागीय योजनाओं को लक्ष्य आधारित और चरणबद्ध तरीके से लागू करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में टीईआरआई नई दिल्ली द्वारा वन पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन, जलवायु परिवर्तन और पारंपरिक ज्ञान से संबंधित पुस्तकों का विमोचन किया गया।

विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा अरण्य भवन, नया रायपुर स्थित दण्डकारण्य सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।  कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड श्री विकास मरकाम ने की। उन्होंने कहा कि वनों को न काटे न कटने दे ये सरकार और हम सभी समाज के लोगों का कर्तव्य भी है। अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने कहा कि वनों की भूमिका को स्थानीय अर्थव्यवस्था और आजीविका से जोड़ते हुए जैव विविधता संरक्षण के साथ आर्थिक लाभ सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से जुड़े वित्तीय संसाधनों जैसे जीसीएफ, जीईएफ और अन्य योजनाओं के तहत परियोजनाएं तैयार करने पर जोर दिया। 

कार्यशाला में तकनीकी सत्र और पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। तकनीकी सत्र में वनों से मिलने वाली पारिस्थितिकी सेवाओं पर प्रस्तुतीकरण, ग्रीन क्लाइमेट फंड परियोजनाओं की जानकारी तथा नाबार्ड द्वारा उपलब्ध वित्तीय सहायता के विकल्पों पर चर्चा की गई। वहीं, पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने वानिकी और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में हो रही प्रगति पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर राष्ट्रीय अनुकूलन कोष परियोजना से जुड़े हितग्राहियों ने भी अपने अनुभव साझा किए।

उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रत्येक वर्ष 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम वन और अर्थव्यवस्थाएँहै, जिसका उद्देश्य वनों के आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व को उजागर करना है। यह कार्यशाला राज्य में वन आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।


Related Post

Archives

Advertisement

Trending News

Archives