March 21, 2026


आधुनिक तकनीक से खेती को किसान मुकेश ने बनाया नया मॉडल , नई सोच के साथ 25 एकड़ में बहुफसली लेकर बने उन्नत किसान

रायपुर : बहु-फसली पद्धति के माध्यम से जैविक खेती को नया रूप दे रहा है, जो मिट्टी के स्वास्थ्य, लचीलेपन और उपज को बढ़ावा देती है। श्री मुकेश कुजूर पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक टिकाऊ कृषि सिद्धांतों के साथ जोड़ता है-यह दर्शाता है कि प्रकृति के साथ खेती करना न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि लाभदायक, जलवायु-अनुकूल खेती का भविष्य भी है।

जशपुर जिला के विकास खंड बगीचा के ग्राम पंचायत भीतघरा के प्रगतिशील किसान मुकेश कुजूर जैसे किसान बहु-फसली खेती के माध्यम से आय दोगुनी कर सफलता का नया मॉडल पेश कर रहे हैं। टमाटर, पत्तागोभी, मक्का,खीरा और गेंदा फूल जैसी फसलें उगाकर ये किसान एक ही जमीन से वर्ष भर सीजनल और वार्षिक मुनाफा कमा रहे हैं। इस तकनीक से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और खरपतवार नियंत्रित रहते हैं।

ग्राम पंचायत भीतघरा, बगीचा विकास खंड के मुकेश कुजूर ने दिखा दिया कि नई सोच और आधुनिक तकनीक से खेती को ज्यादा लाभकारी बनाया जा सकता है। 25 एकड़ में टमाटर, पत्ता गोभी, मक्का, खीरा और गेंदा की बहु-फसली खेती कर ये बना रहे हैं सफलता का नया मॉडल  अगर आप भी सीखना चाहते हैं ऐसी ही नई तकनीकें, तो 23-25 मार्च को कृषि क्रांति एक्सपो, कुनकुरी (जशपुर) में जरूर आएँ।

भीतघरा के किसान मुकेश कुजुर ने अपने 25 एकड़ खेत को नवाचार का मॉडल बना दिया है। किसान अपने खेतों में बहुफसली खेती से जिले के दूसरे किसानों को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं। किसान मुकेश ने नई सोच और प्रयोगों से  साबित किया है कि समझदारी से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।उन्होंने बताया कि वे  सिंचाई के लिए ड्रिप और मल्चिंग से टमाटर की खेती करते हैं। खेतों के बीच बीच में मक्का और गेंदा का फूल भी लगाए हैं जिससे उनको अतिरिक्त आमदनी हो जाती है। उन्होंने बताया कि कृषि वैज्ञानिक की सलाह और मार्गदर्शन में कौन सी किटनाशक दवाइयों का उपयोग करना है कितनी मात्रा में करना इसकी भी जानकारी उन्हें है।

किसान मुकेश ने बताया कि ड्रिप लगाने का फायदा यह होता है कि सिंचाई के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है। इसी से खाद भी सीधे पौधों तक पहुंचाया जाता है। कम पानी से अच्छी फसल ली जा सकती है। किसान मुकेश ने बताया की बरसात में खीरा की फसल लेते हैं और गर्मी में मक्का की फसल ले रहे हैं खीरा और मक्का के उत्पादन से उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है।


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