February 27, 2026


गार्बेज से गौरव तक: डंपिंग ग्राउंड से बनी ‘जनजातीय गौरव वाटिका’

रायपुर : जनजातीय गौरव वाटिका आज बस्तर जिले में विकास, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है। जगदलपुर के कुम्हड़ाकोट क्षेत्र में स्थित यह स्थान कभी गंदगी और अतिक्रमण से प्रभावित डंपिंग ग्राउंड था, लेकिन अब यह एक सुंदर पर्यटन स्थल और स्वरोजगार का केंद्र बन गया है। इस परिवर्तन के पीछे वन विभाग की विशेष पहल और शासन की योजनाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। 

वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में इस क्षेत्र का व्यापक विकास किया गया। आरक्षित वनखंड कक्ष क्रमांक 1021 के इस क्षेत्र को साफ-सुथरा कर यहाँ लगभग 1700 मीटर लंबा नेचर ट्रेल बनाया गया है। साथ ही सुंदर तालाब और एक आकर्षक आइलैंड विकसित किया गया है। लोगों के स्वास्थ्य और मनोरंजन के लिए योग चबूतरा, योग शेड और ओपन जिम की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बैठने के लिए पाँच सुंदर पैगोड़ा और एक आकर्षक पुल भी बनाया गया है।

इस वाटिका की खास बात इसकी समृद्ध वनस्पति है। यहाँ औषधीय पौधे, फलदार वृक्ष और बांस की विभिन्न प्रजातियाँ लगाई गई हैं। पूरी वाटिका को इको-फ्रेंडली और प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया है। यह परियोजना केवल पर्यावरण सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार भी मिला है। महिला स्व-सहायता समूह द्वारा यहाँ जंगल कैंटीन का संचालन किया जा रहा है, जहाँ पर्यटक स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेते हैं।

डीएफओ श्री उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया कि इस पहल से 20 महिलाओं का समूह आत्मनिर्भर बना है। अब तक 10 हजार से अधिक पर्यटक यहाँ आ चुके हैं, जिससे महिला समूह को लगभग दो लाख रुपये की आय प्राप्त हुई है। आज यह स्थान शहरवासियों के लिए सुबह की सैर, योग और शांति का पसंदीदा स्थल बन गया है। गार्बेज से गौरवतक का यह सफर बताता है कि सही योजना, मजबूत नेतृत्व और जनभागीदारी से किसी भी स्थान का कायाकल्प संभव है। यह सफलता कहानी पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रेरणादायक मिसाल है।


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