रायपुर : अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा मन में हो तो जीवन में हर काम आसान हो जाता है। इस कथन को आत्मसमर्पित माओवादियों ने चरितार्थ किया है। जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा की राह अख्तियार किया था, आज उन्हीं हाथों को राज्य की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत कुशल और दक्ष बनाने की कवायद जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। शासन की मंशानुसार ग्राम चौगेल (मुल्ला) कैंप में प्रशिक्षण देकर ’हिंसा से हुनर’ की ओर लौटे माओवादियों को नया जीवनदान मिल रहा है।
आजीविका मूलक गतिविधियों का दिया
जा रहा है प्रशिक्षण
कभी माओवाद गतिविधियों में संलिप्त रहे युवक-युवतियों
को अब ड्राइविंग, सिलाई, काष्ठशिल्प
कला, सहायक इलेक्ट्रिशियन जैसे विभिन्न ट्रेड में सतत्
प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे समाज की मुख्य धारा में
लौटने के बाद आजीविका मूलक गतिविधियों में कुशल होकर बेहतर ढंग से सम्मान पूर्वक
जीवन निर्वाह कर सके।
चौगेल कैंप परिसर बना कौशलगढ़
वर्षों से लाल आतंक के साए में हिंसा का दंश झेल रहा
बस्तर संभाग अब विकास की ओर शनैः-शनैः आगे बढ़ रहा है और माओवाद का दायरा धीरे-धीरे
सिमटता जा रहा है। छत्तीसगढ़ सहित देश को माओवाद से मुक्ति दिलाने केंद्र सरकार के
संकल्प को पूरा करने प्रदेश सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। वहीं हथियार उठाने
वालों को भविष्य गढ़ने का सुनहरा अवसर भी सरकार द्वारा दिया जा रहा है।
आत्मसमर्पित/पीड़ित नक्सल पुनर्वास नीति-2025 के अंतर्गत उन्हें विभिन्न सृजनात्मक और रोजगारमूलक गतिविधियों के तहत
प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भानुप्रतापपुर विकासखंड से लगे ग्राम चौगेल (मुल्ला) का
बीएसएफ कैम्प परिसर ‘कौशलगढ़’ बन गया है,
जहां समाज की मुख्यधारा में लौटे 40 आत्मसमर्पित
माओवादियों को अलग-अलग पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया जा रहा है, साथ ही उन्हें शिक्षित भी किया जा रहा है।
आवश्यकतानुसार कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रमों
का नियमित अध्ययन कराया जा रहा है, जिसमें रूचि लेते
हुए सभी आत्मसमर्पित माओवादी अपने भविष्य को पूरी शिद्दत से गढ़ने में संलग्न हैं। 20-20
का बैच बनाकर उन्हें हुनरमंद बनाने के सतत प्रयास किए जा रहे हैं।
ड्राइविंग सीखने का शौक अब पूरा हो
रहा- मनहेर तारम
चारपहिया वाहन चालन का प्रशिक्षण ले रहे आत्मसमर्पित
माओवादी 40 वर्षीय श्री मनहेर तारम ने बताया कि
पिछले दो सप्ताह से उन्हें ड्रायविंग की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसे वे पूरी रूचि के साथ सीख रहे हैं। ट्रेनर द्वारा स्टेयरिंग थामने से
लेकर क्लच, ब्रेक व एक्सिलरेटर का प्रयोग करना सिखाया जा रहा
है।
उन्होंने बताया कि ड्रायविंग सीखने की चाहत अब पूरी
हो रही है। इसके अलावा सिलाई और काष्ठशिल्प का प्रशिक्षण कैम्प में दिया जा रहा
है। इसी तरह श्री नरसिंह नेताम ने बताया कि वह भी फोरव्हीलर की ड्रायविंग में अपना
हाथ आजमा रहे हैं तथा यहां आकर ऐसी गतिविधियों से जुड़ रहे हैं, जिससे आगे का जीवन बेहतर हो सके।
19 साल के सुकदू पद्दा ने बताया कि
यहां पिछले तीन महीने से ट्रेनिंग ले रहे हैं और खुद को आजीविका मूलक कार्यों से
जोड़ रहे हैं, जबकि वह निरक्षर है। वहीं 19 वर्ष की कु. काजल वेड़दा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का अनुभव साझा करते हुए
कहा कि यहां आकर अलग-अलग पाठ्यक्रमों में नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्हें बचपन से कपड़ों की सिलाई करने की इच्छा थी, यहां आकर
वह भी पूरी हो रही है। वहीं शिक्षकां के द्वारा प्राथमिक शिक्षा का भी वह लाभ ले
रही हैं।
इसी तरह कैंप में रह रहे जगदेव कोमरा, राजू नुरूटी, बीरसिंह मण्डावी, मैनू नेगी, सनऊ गावड़े, मानकी
नेताम, सामको नुरूटी, उंगी कोर्राम,
रमोती कवाची, मानकेर हुपेंडी, डाली सलाम, गेंजो हुपेंडी सहित सभी आत्मसमर्पित
माओवादी अपनी रूचि अनुसार ड्राईविंग, काष्ठशिल्प कला,
सिलाई मशीन तथा सहायक इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में बेहतर ढंग से
प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम
द्वारा उनका नियमितरूप से स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यकतानुसार दवाईयां दी जाती
हैं। कैम्प में मनोरंजनात्मक गतिविधियां कैरम, वाद्य यंत्र,
विभिन्न प्रकार के खेल भी आयोजित किया जाता है।
पुनर्वास कैंप के नोडल अधिकारी श्री विनोद अहिरवार ने
बताया कि कलेक्टर उत्तर बस्तर कांकेर के निर्देशानुसार आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए विभिन्न पाठ्यक्रमों में 20-20
के बैच में चौगेल (मुल्ला) कैंप में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए
जा रहे हैं और सभी को बेहतर ढंग से प्रशिक्षित किया जा रहा है।
भविष्य में मशरूम उत्पादन, बागवानी सहित विभिन्न सृजनात्मक एवं स्वरोजगार मूलक पाठ्यक्रमों में जल्द
ही प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस तरह आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे माओवादियों को
राज्य शासन द्वारा अवसर देकर उन्हें आत्मनिर्भर तथा स्वरोजगारमूलक सकारात्मक
कार्यों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन
व्यतीत करने का मौका मिल सके।