रायपुर : वर्षों तक कच्चे मकान की असुरक्षा में जीवन काटने के बाद, अब प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके सिर पर पक्की छत का सपना साकार कर दिया है। ग्राम पंचायत कसियारा निवासी साधो बाई पटेल के लिए आज का सूरज एक नई उम्मीद और सुकून लेकर आया है। यह मकान केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि साधो बाई के लिए स्वाभिमान और सुरक्षा का प्रतीक बन गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY)
(ग्रामीण)के तहत 2.5 लाख रूपएकी वित्तीय
सहायता मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) (Economically Weaker
Section) के लिए है, जो शहरी क्षेत्रों में
अपने पक्के मकान के बिना रहते हैं और जिनकी वार्षिक आय 3 लाख
रूपए तक है, उन्हें अपनी भूमि पर घर बनाने या खरीदने के लिए
यह राशि मिलती है। इसके लिए यह भी ज़रूरी है कि परिवार के किसी सदस्य के नाम पर
भारत में कोई और पक्का घर न हो और उन्होंने पहले किसी सरकारी आवास योजना का लाभ न
लिया हो।
अपने संघर्ष के दिनों को याद करते
हुए साधो बाई बताती हैं कि पहले का जीवन बेहद कष्टदायक था। मिट्टी की दीवारों और
कच्ची छत के कारण बारिश के दिनों में घर के भीतर पानी टपकता था,
जिससे न केवल गृहस्थी का सामान खराब होता था, बल्कि
मेहनत से जुटाया गया राशन भी भीग जाता था। इतना ही नहीं, कच्चे
घर में हमेशा जहरीले कीड़े-मकोड़ों का भय बना रहता था। कड़ाके की ठंड में रूह कंपा
देने वाली सर्द हवाएं घर के भीतर तक प्रवेश कर जाती थीं, जिससे
रातें काटना दूभर हो जाता था और पूरा जीवन अस्त-व्यस्त रहता था। लेकिन
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने के बाद अब उनके जीवन की ये सभी
परेशानियां बीते कल की बात हो गई हैं।
साधो बाई अब एक सुरक्षित और
सम्मानजनक परिवेश में रह रही हैं, जहाँ न
तो उन्हें बारिश का डर है और न ही ठंड की चिंता। इस बड़ी राहत के लिए उन्होंने देश
के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का हृदय से
आभार व्यक्त किया है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि सरकार की इस योजना ने उनके जैसे
गरीब परिवारों को न केवल छत दी है, बल्कि जीने का एक नया
आधार भी प्रदान किया है।