January 20, 2026


सरसों की खेती से आत्मनिर्भर बनीं बजरहीन बाई गोंड़, उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि से परिवार की आर्थिक स्थिति हुई सुदृढ़

रायपुर : भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ खेती न केवल आजीविका का साधन है बल्कि आत्मनिर्भरता का आधार भी है। छत्तीसगढ़ में भी किसान आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं के सहयोग से निरंतर प्रगति कर रहे हैं। इसी तारतम्य मेंमुंगेली जिले के विकासखंड लोरमी के ग्राम बिंदावल की कृषक महिला बजरहीन बाई गोंड़ की, जिन्होंने सरसों की खेती से अपनी मेहनत और सरकारी सहयोग के बल पर सफलता की नई मिसाल कायम की है।

बजरहीन बाई गोंड़, पिछले 30 वर्षों से खेती से जुड़ी हुई हैं। उनके परिवार की आजीविका पूरी तरह कृषि पर निर्भर है। वर्ष 2025-26 में उन्होंने कृषि विभाग की तरफा योजना अंतर्गत सरसों फसल प्रदर्शन में भाग लिया। इस योजना के तहत उन्हें 1.970 हेक्टेयर क्षेत्र में उन्नत सरसों बीज उपलब्ध कराया गया।

कृषि विभाग लोरमी द्वारा न केवल बीज प्रदान किए गए, बल्कि समय-समय पर खाद, रोग-व्याधि नियंत्रण किट तथा कृषि वैज्ञानिकों द्वारा प्रशिक्षण भी दिया गया। आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक मार्गदर्शन का सकारात्मक प्रभाव फसल पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। परिणामस्वरूप, बजरहीन बाई गोंड को असिंचित क्षेत्र में 01 हेक्टेयर से 16 क्विंटल सरसों का उत्पादन प्राप्त हुआ, जो क्षेत्र की औसत उपज से कहीं अधिक है।

 इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई। बजरहीन बाई गोंड़ बताती हैं कि कृषि विभाग की योजनाओं ने उन्हें न केवल बेहतर उत्पादन दिया, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता भी प्रदान की। उन्होंने इस सफलता के लिए कृषि विभाग लोरमी एवं जिला प्रशासन मुंगेली का आभार व्यक्त किया है।


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